भारत में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मई महीने में बहुत हद तक स्थिर रही। ऐसा मांग से जुड़ी अनुकूल परिस्थितियां, नए ग्राहक मिलने और उद्योगों की ओर से रोजगार देने की बेहतर क्षमता के कारण संभव हो पाया। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मई में 58.8 पर रहा। यह अप्रैल के 58.7 की तुलना में मामूली रूप से ऊपर रहा और इसमें तीव्र विस्तार की संभावना दिखी। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में, 50 से ऊपर का अंक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन को दर्शाता है।
कंपनियों ने मई के दौरान भारत के सेवा क्षेत्र के लिए सेवाओं के लिए वैश्विक मांग में भी लगभग सुधार दिखा। विशेष रूप से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में नए निर्यात ऑर्डरों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। भंडारी ने कहा, "बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत के सेवा प्रदाताओं ने कर्मचारियों की भर्ती में भारी वृद्धि की। ऐसे में, रोजगार सूचकांक इस सर्वेक्षण में अब तक दर्ज किए गए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।"
पैनल के लगभग 16 प्रतिशत सदस्यों ने वेतन वृद्धि की बात कही, जबकि 1 प्रतिशत ने गिरावट का संकेत दिया। सर्वेक्षण में कहा गया, "सर्वेक्षण के इतिहास में रोजगार सृजन की समग्र दर सबसे मजबूत थी।" कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि और ओवरटाइम भुगतान के कारण कंपनियों की लागत में वृद्धि हुई। कुछ कंपनियों ने खाना पकाने के तेल, सामग्री और मांस पर अधिक व्यय का भी हवाला दिया।
इस बीच, मूल्य सूचकांकों ने इनपुट लागत और आउटपुट चार्ज मुद्रास्फीति में तेजी दिखाई। दोनों ही मामले में वृद्धि दर अपने ऐतिहासिक औसत से ऊपर पहुंच गई। मई में कारोबारी धारणा में सुधार हुआ। उम्मीद है कि अधिक स्टाफिंग क्षमता, ग्राहक बढ़ने और मार्केटिंग से इस साल सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मदद मिलेगी। इस बीच, एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट सूचकांक मई में 59.3 पर आ गया। यह अप्रैल के 59.7 से मामूली रूप से कम है। यह समग्र गतिविधि में आगे तीव्र वृद्धि का संकेत देता है।