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सब्जियों के दाम और ग्रामीण महंगाई ने बिगाड़ा बजट: सितंबर में 5.54% पर पहुंची खुदरा मुद्रास्फीति, जानिए आंकड़े

Mon, 12 Oct 2026 04:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सितंबर में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54% पर पहुंची। सब्जियों की बढ़ती कीमतों और ग्रामीण महंगाई ने बढ़ाया दबाव। जानिए आरबीआई के रेट हाइक और FY27 के नए अनुमानों का पूरा विश्लेषण। अभी पढ़ें।
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खुदरा महंगाई दर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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खाद्य पदार्थों- विशेषकर सब्जियों- की कीमतों में आए तेज उछाल के कारण सितंबर 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह अगस्त में दर्ज 4.83% की तुलना में एक बड़ी छलांग है। यह लगातार चौथा महीना है जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के मध्यम-अवधि लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।

यह आंकड़ा 2024 के नए आधार वर्ष वाली संशोधित सीपीआई श्रृंखला के तहत वर्ष 2026 की अब तक की सबसे उच्चतम दर है। इससे पहले जून में महंगाई दर 4.38%, जुलाई में 4.45% और अगस्त में 4.83% दर्ज की गई थी। यह बढ़ोतरी रॉयटर्स के 41 अर्थशास्त्रियों के पोल अनुमान (5.40%) से भी अधिक रही है।

सितंबर में महंगाई बढ़ने के पीछे कौन-से मुख्य कारक रहे हैं?

खुदरा मुद्रास्फीति में इस तेजी का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं, मुख्य रूप से सब्जियों की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बढ़ते दाम, कमजोर होता रुपया और कृषि पैदावार को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को अधिक जटिल बना दिया है।

  • ग्रामीण और शहरी महंगाई में अंतर: सितंबर में ग्रामीण सीपीआई मुद्रास्फीति उछलकर 6.08% पर पहुंच गई, जो अगस्त में 5.24% थी। इसके मुकाबले शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर 4.88% दर्ज की गई, जो पिछले महीने 4.31% थी।

  • खाद्य और ईंधन का असर: एल नीनो परिस्थितियों, कम बारिश (डेफिशिएंट मानसून) और वैश्विक बाजार में महंगे कच्चे तेल ने आयातित मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा दिया है।

रिजर्व बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 7 अक्टूबर 2026 को बेंचमार्क रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया। करीब चार वर्षों में यह पहला मौका है जब केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में वृद्धि की है। इससे पहले 2025 में रेपो रेट में कुल 1.25% की कटौती की गई थी और लगातार चार समीक्षा बैठकों में इसे 5.25% पर स्थिर रखा गया था।

  • मुद्रास्फीति के दायरे का विस्तार: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई अब उपभोक्ता बास्केट के बड़े हिस्से में फैल रही है। अगस्त में 4% से अधिक मुद्रास्फीति दर्ज करने वाली वस्तुओं की भारित हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 37% हो गई थी।

  • व्यापक आर्थिक जोखिम: एमपीसी ने उच्च मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं और कंपनियों के मूल्य निर्धारण व्यवहार पर दबाव के संकेतों को भी रेखांकित किया है।

वित्त वर्ष 2027 के लिए आरबीआई का नया मुद्रास्फीति अनुमान क्या है?

बढ़ते मूल्य दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अनुमान को 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है।

  • तिमाही-वार पूर्वानुमान:

    • दूसरी तिमाही (Q2 FY27): 4.9%

    • तीसरी तिमाही (Q3 FY27 - दिसंबर तिमाही): 6.0%

    • चौथी तिमाही (Q4 FY27 - मार्च तिमाही): 5.7%

    • वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही (Q1 FY28): 5.6%

हालांकि, केंद्रीय बैंक का मानना है कि पर्याप्त खाद्यान्न बफर स्टॉक और सरकार के समयबद्ध प्रशासनिक कदमों से मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रभाव को कुछ हद तक सीमित किया जा सकता है।

सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति का 5.54% पर पहुंचना और ग्रामीण इलाकों में इसका 6% के पार जाना यह दर्शाता है कि खाद्य कीमतों का दबाव अब व्यापक अर्थव्यवस्था में स्थानांतरित हो रहा है। रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी और FY27 के लिए 5.2% का बढ़ा हुआ अनुमान यह संकेत देता है कि आने वाली तिमाहियों में मौद्रिक नीति का रुख सख्त बना रह सकता है।

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