भारत के आर्थिक इतिहास में वर्ष 2025 ऐसी विनियमन क्रांति लेकर आया जिसने न केवल कारोबार करना और सुगम बनाया बल्कि उन्हें बिना किसी बाधा के विस्तार का मौका भी दिया। तमाम उपनिवेशकालीन कानून खत्म होने से भारत में व्यापार करना अब किसी बाधा दौड़ जैसा नहीं रहा। वर्ष 1991 के सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोले थे तो 2025 के सुधारों ने कारोबारियों को सरकारी लालफीताशाही और इंस्पेक्टर राज के डर से आजाद कर दिया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सत्ता शीर्ष ने स्पष्ट तौर पर एक ही मंत्र अपना रखा है। व्यापारियों को कागजी खानापूरी के जाल में उलझाने के बजाय बेझिझक आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। पुराने कानूनों को खत्म करने और नियमों को सरल बनाने का ही नतीजा है कि आज भारत में कंपनियों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो चुकी है और दुनियाभर के निवेशक भारत को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार की नीतियों में बदलाव से भारत में व्यापार करना अब एक सुखद अनुभव बन गया है जबकि 2010 के दशक की शुरुआत में भारत में व्यापार करना किसी बाधा दौड़ जैसा होता था। दशकों तक, भारतीय कंपनियां अपना कारोबार बढ़ाने में हिचकिचाती थी क्योंकि जैसे ही 10वें, 20वें या 100वें कर्मचारी को काम पर रखतीं, लगभग 29 केंद्रीय श्रम कानूनों में समाहित नियम-कायदे उनके गले की फांस बन जाते।
कंपनी छोटी रखने की मानसिकता बदली
कानूनी पेचदगियों से बचने के लिए अपनी कंपनी को छोटा बनाए रखने की मानसिकता 2025 में पूरी तरह बदल गई। भारत में व्यापार करना अब एक सहज अनुभव बन चुका है, सक्रिय कंपनियों की संख्या दोगुनी होना और बंदरगाहों पर जहाजों की रिकॉर्ड रफ्तार इसका प्रमाण है। सरकार ने छोटी कंपनियों के लिए टर्नओवर की सीमा दस गुना बढ़ाकर 100 रुपये करोड़ कर दी। साथ ही दर्जनों श्रम कानूनों को खत्म करके चार सरल श्रम संहिताएं बनाईं, जिससे अनिश्चितता की स्थिति पूरी तरह खत्म हुई।
निरंतर प्रयासों से बदल रही सूरत
साल 2014 में निर्माण परमिट मिलने के मामले भारत 190 देशों में से 184वें स्थान पर था। कुछ करने की सिर्फ अनुमति पाने के लिए 186 दिन तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम ने स्थितियां आसान कर दी हैं। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस श्रेणी में अब 27वें स्थान पर पहुंच गया है। सक्रिय कंपनियों की संख्या मार्च 2014 के 9.52 लाख से लगभग दोगुनी होकर मार्च 2025 में 18.51 लाख पहुंच गई।
सुधारों से बदली तस्वीर
गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों की समीक्षा कर 76 श्रेणियों से अनिवार्य अनुपालन हटाया गया और 200 से अधिक अन्य श्रेणियों को विनियंत्रित किया गया। 25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ निर्यात संवर्धन मिशन की शुरुआत की गई, जिसमें एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी शामिल है। रिजर्व बैंक ने 9,000 पुराने परिपत्रों को मात्र 238 मास्टर दिशा-निर्देशों में समेट दिया। nभारत ने ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए। 1908 और 1925 के पुराने समुद्री कानूनों को बदलकर पांच नए आधुनिक कानून लागू किए गए। जहाजों का टर्नअराउंड समय 4 दिन (2014) से घटकर 1 दिन से भी कम (2025) रह गया है। जन विश्वास 1.0 और 2.0 के तहत 200 से अधिक तकनीकी अपराधों को गैर-आपराधिक घोषित किया गया। राजग शासित राज्यों ने 1,000 से अधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी।