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Moodys: भारत का निजी ऋण बाजार पांच साल में 25 अरब डॉलर हुआ, आरबीआई के नए नियम बढ़ाएंगे प्रतिस्पर्धा

Thu, 02 Jul 2026 04:22 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मूडीज रेटिंग्स के अनुसार, भारत का निजी ऋण बाजार पांच साल में दोगुना होकर 25 अरब डॉलर हो गया है। आरबीआई के नए अधिग्रहण वित्तपोषण नियमों से बैंकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे निजी ऋण प्रदाताओं पर असर पड़ सकता है।
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निजी क्षेत्र की ओर से वित्त पोषण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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मूडीज रेटिंग्स ने गुरुवार को बताया कि भारत का निजी ऋण बाजार पिछले पांच वर्षों में दोगुना हो गया है। 2025 के अंत तक इसका प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) करीब 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। मजबूत वित्तपोषण मांग के कारण यह बाजार आगे भी बढ़ेगा। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए नियम बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देंगे।

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ये नए नियम उस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएंगे, जिस पर ऐतिहासिक रूप से वैकल्पिक पूंजी का प्रभुत्व रहा है। मूडीज ने कहा कि नए नियम उधारकर्ताओं को लागत कम करने और वित्तपोषण की उपलब्धता बढ़ाने में लाभ पहुंचा सकते हैं। लेकिन ये निजी ऋण प्रदाताओं के लिए अधिग्रहण वित्तपोषण में प्रतिफल को कम कर सकते हैं। साथ ही, इससे सौदों का प्रवाह भी घट सकता है।

आरबीआई के नए नियम 1 जुलाई से प्रभावी हो गए हैं। पहली बार आरबीआई ने बैंकों को कुछ शर्तों के अधीन इक्विटी शेयरों और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के रणनीतिक अधिग्रहण के लिए धन देने की अनुमति दी है। मूडीज के अनुसार, भारत का निजी ऋण बाजार तेजी से विकसित हुआ है। यह मुख्य रूप से संकटग्रस्त कंपनियों के लिए वित्तपोषण के स्रोत से आगे बढ़कर वित्तीय रूप से स्थिर व्यवसायों के लिए ऋण प्रदाता बन गया है।

निजी ऋण बाजार इतनी तेजी से क्यों बढ़ा है?

भारत का निजी ऋण बाजार पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2025 में इसका वार्षिक लेनदेन मूल्य 11 अरब डॉलर से अधिक था। उसी वर्ष के अंत तक इसका एयूएम लगभग 25 अरब डॉलर था। वैश्विक मानकों के अनुसार यह बाजार अभी भी छोटा है। देश में मजबूत आर्थिक स्थितियों के बीच वित्तपोषण की जरूरतें बढ़ने से इसकी वृद्धि तेज होगी। भारत के निजी ऋण बाजार में बढ़ने की काफी गुंजाइश है। यह बढ़ती वित्तपोषण जरूरतों और देश की मजबूत व्यापक आर्थिक गति से समर्थित है।

आरबीआई के नए नियमों का क्या असर होगा?

आरबीआई के नए नियम बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देते हैं। इससे निजी ऋण बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। पहले यह क्षेत्र वैकल्पिक पूंजी पर निर्भर था। उधारकर्ताओं को कम लागत पर अधिक वित्तपोषण मिल सकता है। हालांकि, निजी ऋण प्रदाताओं के लिए प्रतिफल कम हो सकता है। अधिग्रहण वित्तपोषण के सौदों में भी कमी आ सकती है। यह बदलाव बाजार की गतिशीलता को प्रभावित करेगा।

किन क्षेत्रों में निजी ऋण की अधिक मांग है?

रियल एस्टेट क्षेत्र निजी ऋण के कुल मूल्य का लगभग 40 फीसदी हिस्सा रखता है। बुनियादी ढांचा और उपयोगिता कंपनियां अगले सबसे बड़े हिस्सेदार हैं। विभिन्न क्षेत्रों में प्रवर्तकों के नेतृत्व वाला वित्तपोषण भी भारत में निजी ऋण बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वित्तपोषण अक्सर पुनर्वित्त, देयता प्रबंधन या हिस्सेदारी अधिग्रहण जैसे उद्देश्यों के लिए होता है। इन क्षेत्रों में मजबूत मांग से बाजार को और बढ़ावा मिल रहा है।

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