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PMI: फरवरी में चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा भारत का पीएमआई, निर्यात को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े

Mon, 02 Mar 2026 11:59 AM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फरवरी में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि मजबूत रही और पीएमआई बढ़कर 56.9 पर चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसे मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डरों का सहारा मिला। हालांकि, नए निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि 17 महीनों के सबसे धीमे स्तर पर रही।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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फरवरी में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार और मजबूत हुई है। एचएसबीसी के सर्वे के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जनवरी के 55.4 से बढ़कर चार महीने के उच्च स्तर 56.9 पर पहुंच गया। यह स्तर सेक्टर की सेहत में स्पष्ट सुधार और निरंतर विस्तार का संकेत देता है।

घरेलू मांग से कैसे पड़ा असर?

  • सर्वे में बताया गया कि घरेलू मांग में मजबूत बढ़त ने नए ऑर्डरों को बढ़ावा दिया, जिससे उत्पादन में चार महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
  • मांग में मजबूती, मार्केटिंग पहलों और ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों के चलते नए कारोबार में लगातार इजाफा हुआ।
  • नए ऑर्डरों की वृद्धि दर ऐतिहासिक रूप से ऊंची बताई गई और यह पिछले साल अक्तूबर के बाद सबसे मजबूत रही।

चार महीने की हुई सबसे तेज गति

उत्पादन भी चार महीने की सबसे तेज गति से बढ़ा और दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा। पैनल सदस्यों के मुताबिक दक्षता में सुधार, मजबूत मांग, नए काम के बढ़ते ऑर्डर और तकनीकी निवेश ने उत्पादन वॉल्यूम को सहारा दिया। बढ़ते कार्यभार के बीच कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद बढ़ाई, इन्वेंट्री में इजाफा किया और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की, जो मांग की निरंतरता को लेकर भरोसा दर्शाता है।

बाहरी मांग को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?

हालांकि, निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि में नरमी देखी गई। फरवरी में बाहरी मांग में विस्तार 17 महीनों के सबसे धीमे स्तर पर रहा, जो दीर्घकालिक औसत के करीब रहा। जहां निर्यात बिक्री बढ़ी, वहां कंपनियों ने एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका से मांग का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार एक क्षेत्र जहां वृद्धि में कमी आई, वह नए निर्यात ऑर्डर रहे, जिनमें फरवरी में बढ़ोतरी 17 महीनों की सबसे धीमी रही।

क्या है उद्योग जगत का अनुमान?

इसके बावजूद समग्र परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। आने वाले एक साल के लिए उत्पादन को लेकर कंपनियां आशावादी दिखीं, जहां 16 प्रतिशत कंपनियों ने वृद्धि का अनुमान जताया, जबकि 1 प्रतिशत से भी कम ने गिरावट की आशंका जताई। कुल मिलाकर, फरवरी के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि मजबूत घरेलू मांग विनिर्माण गतिविधियों को सहारा दे रही है, भले ही निर्यात वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी हो।

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