केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि सरकार ने मोबाइल फोन उद्योग से कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये का कर एकत्र किया है। यह राशि मोबाइल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) के तहत दिए गए 19,000 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है। उन्होंने मीडिया की उन आलोचनाओं का जवाब दिया जो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों पर सवाल उठा रही थीं।
वैष्णव ने 'एक्स' पर साझा किए गए आंकड़ों में बताया कि सरकार ने योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया। इसके बदले में लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में 25 लाख लोग कार्यरत हैं, जिसमें अकेले मोबाइल विनिर्माण में 12 लाख लोगों को रोजगार मिला है। मंत्री का यह बयान एक मीडिया राय वीडियो के जवाब में आया था। इस वीडियो में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को सब्सिडी के जरिये बढ़ावा देने के प्रयासों की कमियां बताई गई थीं।
क्या भारत को मोबाइल निर्यात से फायदा हो रहा है?
मार्च में सरकार द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष 2025 में 2 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात किया। देश में मोबाइल फोन का आयात लगभग नगण्य हो गया है। 2024-25 में यह घरेलू मांग का लगभग 0.02 फीसदी रहा। जबकि 10 साल पहले यह 75 फीसदी था। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में मोबाइल उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?
2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन छह गुना होकर लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 साल पहले के 0.38 लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर 2024-25 में लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़े देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत वृद्धि को दर्शाते हैं।
सरकार की अगली योजना क्या है?
सरकार ने अब मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है। इस योजना के तहत उपकरणों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुल 62,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिन्हें स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया जाएगा। वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्तूबर 2028 की समय-सीमा तय की है।