पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और ऊर्जा क्षेत्र में सुस्त वृद्धि का असर अब भारत के औद्योगिक उत्पादन पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत की फैक्ट्री आउटपुट यानी औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर धीमी होकर 4.9 प्रतिशत पर आ गई है। हालांकि, इस बार के आंकड़ों की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खासियत यह है कि इन्हें औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के नए 'आधार वर्ष' 2022-23 के तहत जारी किया गया है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में IIP की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत थी, जो इस साल अप्रैल में घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई है। त्वरित अनुमान के अनुसार, सूचकांक अप्रैल 2025 के 113.1 के मुकाबले अप्रैल 2026 में 118.9 पर रहा है।
अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश करने के लिए सांख्यिकी मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। यह बदलाव 'तकनीकी सलाहकार समिति' (टीएसी-आईआईपी) की सिफारिशों पर किया गया है, जिसकी रिपोर्ट 25 मई 2026 को जारी हुई थी। आपको बता दें कि 1937 में पहली बार आईआईपी तैयार होने के बाद से यह आधार वर्ष में 10वां संशोधन है। नए आधार वर्ष से भारत के औद्योगिक उत्पादन का अधिक सटीक, प्रासंगिक और व्यापक मापन हो सकेगा।
नई आईआईपी सीरीज में देश के औद्योगिक उत्पादन में आई विविधता और नई तकनीकों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया है। लेखा महानियंत्रक द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
सरकार का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था की आधुनिक और वास्तविक तस्वीर पेश करता है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, यह नई सीरीज ज्यादा विस्तृत जानकारी देगी; उदाहरण के तौर पर, अब नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अलग-अलग मापा जाएगा। उन्नत बास्केट से उभरते औद्योगिक उत्पादों को बेहतर जगह मिलेगी। आईआईपी के ये आंकड़े अब संदर्भ महीने से 28 दिनों के अंतराल पर हर महीने जारी किए जाएंगे, जिससे नीति निर्माताओं और बाजार निवेशकों को अर्थव्यवस्था की असली नब्ज पकड़ने में अधिक मदद मिलेगी।