भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर लगभग दो साल के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर आ गई, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 8.1 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से शुक्रवार को इसके आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए।
2024-25 में अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 8.2 प्रतिशत की तुलना में 6 प्रतिशत रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि अक्तूबर 2024 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले इसी महीने में 12.7 प्रतिशत थी।
एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 की दूसरी तिमाही में मौजूदा कीमतों पर नाममात्र जीडीपी या जीडीपी 76.60 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की दूसरी तिमाही में यह 70.90 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।
बयान में कहा गया है कि अर्ध-वार्षिक आधार पर 2024-25 के अप्रैल-सितंबर (वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही) में वास्तविक जीडीपी या स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 87.74 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की पहली छमाही में यह 82.77 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।
इसमें कहा गया है कि 2024-25 की पहली छमाही में मौजूदा कीमतों पर नाममात्र जीडीपी या जीडीपी 153.91 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की पहली छमाही में यह 141.40 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।
इस बीच, सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों के अंत में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 46.5 प्रतिशत तक पहुंच गया। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक रूप से राजकोषीय घाटा - सरकार के व्यय और राजस्व के बीच का अंतर - अप्रैल-अक्टूबर अवधि के दौरान 7,50,824 करोड़ रुपये था। वर्ष 2023-24 की इसी अवधि में घाटा बजट अनुमान (बीई) का 45 प्रतिशत रहा।
आरबीआई के अनुसार, 22 नवंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.31 अरब डॉलर घटकर 656.582 अरब डॉलर रह गया।