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GDP: वृद्धि दर दूसरी तिमाही में दो साल के निचले स्तर 5.4% पर फिसली, उपभोग घटने से प्रभावित हुए आंकड़े

Fri, 29 Nov 2024 04:28 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

GDP: सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में छह प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी अवधि में 8.2 प्रतिशत थी। सरकार ने शुक्रवार को इसके आंकड़े जारी किए। आइए इस बारे में जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर लगभग दो साल के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर आ गई, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 8.1 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से शुक्रवार को इसके आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए।

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हालांकि, भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। इस वर्ष जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि 4.6 प्रतिशत रही। जीडीपी वृद्धि का पिछला निम्न स्तर 4.3 प्रतिशत वित्तीय वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2022) में दर्ज किया गया था।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, कृषि क्षेत्र का जीवीए (सकल मूल्य वर्धन) 2023-24 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 1.7 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र की जीवीए वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घटकर 2.2 प्रतिशत रह गई, जबकि एक वर्ष पूर्व इसमें 14.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।

बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि अक्तूबर 2024 में घटकर 3.1% रह गई

2024-25 में अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 8.2 प्रतिशत की तुलना में 6 प्रतिशत रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि अक्तूबर 2024 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले इसी महीने में 12.7 प्रतिशत थी।

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वित्तीय, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं में जीवीए की वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पूर्व इसी तिमाही में 6.2 प्रतिशत थी। बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं की वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पूर्व की 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से कम है। निर्माण क्षेत्र में दूसरी तिमाही में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की 13.6 प्रतिशत से कम है।

2024-25 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही। एनएसओ ने एक बयान में कहा, "2024-25 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी या स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 44.10 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की दूसरी तिमाही में यह 41.86 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।"

दूसरी तिमाही में जीडीपी 76.60 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान

एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 की दूसरी तिमाही में मौजूदा कीमतों पर नाममात्र जीडीपी या जीडीपी 76.60 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की दूसरी तिमाही में यह 70.90 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।

बयान में कहा गया है कि अर्ध-वार्षिक आधार पर 2024-25 के अप्रैल-सितंबर (वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही) में वास्तविक जीडीपी या स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 87.74 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की पहली छमाही में यह 82.77 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।

इसमें कहा गया है कि 2024-25 की पहली छमाही में मौजूदा कीमतों पर नाममात्र जीडीपी या जीडीपी 153.91 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2023-24 की पहली छमाही में यह 141.40 लाख करोड़ रुपये होगी, जो 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।

इस बीच, सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों के अंत में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 46.5 प्रतिशत तक पहुंच गया। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक रूप से राजकोषीय घाटा - सरकार के व्यय और राजस्व के बीच का अंतर - अप्रैल-अक्टूबर अवधि के दौरान 7,50,824 करोड़ रुपये था। वर्ष 2023-24 की इसी अवधि में घाटा बजट अनुमान (बीई) का 45 प्रतिशत रहा।

विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट

आरबीआई के अनुसार, 22 नवंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.31 अरब डॉलर घटकर 656.582 अरब डॉलर रह गया।

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