भारत की महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन मुहिम ने करोड़ों नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण आबादी के आर्थिक जीवन को मौलिक रूप से बदल दिया है। 'ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस समिट' में बोलते हुए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के शुभारंभ को भारत के इतिहास के 'सबसे परिवर्तनकारी दिनों में से एक' बताया।
डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अप्रैल 2015 से अब तक लगभग 38 लाख करोड़ रुपये के 56.32 करोड़ ऋण स्वीकृत किए हैं। इनमें से 67 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।
एम. नागराजू ने मंगलवार को संकेत दिए कि भारत अब विशेष रूप से पूर्वी एशिया (ईस्ट एशिया) के देशों में यूपीआई की मौजूदगी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 'ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट' को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि यह कदम न केवल भारतीय पर्यटकों के लिए विदेशों में लेनदेन को आसान बनाएगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा।
आठ देशों में मौजूदगी और भविष्य का रोडमैप वर्तमान में, भारत का यूपीआई नेटवर्क दुनिया के आठ महत्वपूर्ण देशों- भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), श्रीलंका और फ्रांस में स्वीकार किया जा रहा है। इन देशों में भारतीय पर्यटक अपने घरेलू यूपीआई ऐप के माध्यम से सीधे भुगतान कर सकते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा विनिमय की जटिलताएं कम हुई हैं। सचिव नागराजू के अनुसार, भारत अब इस सफलता को पूर्वी एशियाई बाजारों तक ले जाने की तैयारी में है, जो पर्यटन और व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।