फियो के अध्यक्ष ने डॉ. एस.सी रल्हन ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। भारतीय निर्यातक शिपमेंट के मार्ग बदलने, बाजारों में विविधता लाने और वित्तीय जोखिमों का मजबूती से सामना कर रहे हैं।
वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र मजबूती से खड़ा है। फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष डॉ. एस.सी रल्हन ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान और इस्राइल दोनों के साथ हमारा व्यपार महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत के कुल निर्यात और आयात में इन देशों की हिस्सेदारी सीमित है। सरकार और उद्योग संयुक्त रूप से घटनाओं पर नजर रख रहे हैं, ताकि न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित किया जा सके।
फियो ने कहा कि पश्चिम एशिया के तनाव से मांग और लॉजिस्टिक्स पर कुछ अल्पकालिक प्रभाव की आशंका है। खास तौर से खाड़ी क्षेत्र में, जो भारतीय निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत को दूसरे समुद्री क्षेत्रों से निर्यात करना पड़ेगा। इससे शिपिंग लागत जरूर बढ़ेगी, अधिक समय लगेगा और समुद्री बीमा प्रीमियम से दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारतीय निर्यातक शिपमेंट के मार्ग बदलने, बाजारों में विविधता लाने और वित्तीय जोखिमों का मजबूती से सामना करते आ रहे हैं। एमएसएमई और बड़े पैमाने के निर्यातकों के साथ-साथ मजबूत सरकारी समर्थन तंत्र इन झटकों को कम करने में मदद करेंगे।
भारत के पास हैं दूसरे स्रोत
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए दूसरे स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा दी है। इसकी बड़ी मात्रा अब होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं आती है। तेल विपणन कंपनियों के पास कई सप्ताह के लिए आपूर्ति है और उन्हें कई मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि ईंधन आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।