भारतीय शेयर बाजार में पहली तिमाही के नतीजों का सीजन लगभग खत्म हो चुका है, ज्यादातर प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों ने पहले ही अपने परिणामों की घोषणा कर दी है। ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई डायरेक्ट के एक विश्लेषण के अनुसार, पहली तिमाही में मजबूत आंकड़े देने वाले शीर्ष चार क्षेत्र पूंजी बाजार, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (Consumer Durable), इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाएं और अपशिष्ट प्रबंधन हैं।
कैपिटल मार्केट्स सेक्टर पर आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने बताया है कि इससे जुड़ी कंपनियों ने मजबूत परिणाम दिए है। इसका कारण बढ़ता वॉल्यूम, ऑर्डर और ग्राहकों की संख्या में इजाफा रहा है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) सेक्टर में भी वृद्धि देखी गई, जिसे उत्साही शुद्ध इक्विटी प्रवाह और रिकॉर्ड-उच्च एसआईपी प्रवाह से मदद मिली है।
विश्लेषण में कहा गया है कि मध्यम वर्ग में वृद्धि और बढ़ता वित्तीय समावेशन घरेलू बचत को निवेश उत्पादों और वित्तीय बाजारों की ओर स्थानांतरित कर रहा है, जिससे विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा हो रहा है।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने कहा कि टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में गर्मी के मौसम में तिमाही के दौरान मजबूत वृद्धि हुई। बढ़ते तापमान ने एयर कंडीशनर की मांग को काफी बढ़ा दिया, जिसके परिणामस्वरूप कंज्यूमर ड्यूरेबल्स फर्मों के लिए मजबूत टॉपलाइन ग्रोथ दर्ज की गई।
कम इनपुट लागत, बेहतर उत्पाद मिश्रण और परिचालन दक्षता के कारण उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र के मार्जिन में विस्तार हुआ। इस क्षेत्र के विकास चालकों में कम पैठ, उच्च डिस्पोजेबल आय के साथ बढ़ती मध्यम वर्ग की आबादी और तेजी से हो रहा शहरीकरण शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवा (ईएमएस) कंपनियों के लिए, विश्लेषण ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), एयरोस्पेस, रेलवे और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन) जैसे क्षेत्रों में मजबूत मांग का संकेत दिया।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने कहा, "भारत का इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का विनिर्माण अगले पांच वर्षों में दोगुना होने का अनुमान है, जो 125 बिलियन अमरीकी डालर से बढ़कर लगभग 250 बिलियन अमरीकी डालर हो जाएगा।"
सरकार ने वित्त वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 100 बिलियन अमरीकी डॉलर करने का लक्ष्य रखा है, जिससे इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। पीएलआई योजनाओं और कर प्रोत्साहन जैसी नीतियां उद्योग को पर्याप्त लाभ पहुंचा रही हैं।
अंत में, अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र ने तिमाही के दौरान मजबूत मात्रा में वृद्धि दर्ज की। विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (ईपीआर) नियमों को पूरा करने के लिए सीसा, प्लास्टिक और टायर के लिए पुनर्नवीनीकरण सामग्री पर जोर देने के साथ औपचारिक और संगठित रीसाइक्लिंग से बदलाव आया है।
भारत में 75 प्रतिशत रिसाइक्लिंग योग्य कचरे का केवल 30 प्रतिशत रिसाइकिल किया जा रहा है, इस क्षेत्र में विकास के बड़े अवसर हैं। आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने कहा, "उद्योग महत्वपूर्ण विकास के लिए तैयार है, जो पर्यावरण जागरूकता और नियामकीय दबावों की आवश्यकता में वृद्धि करता हैं।"