भारत के नौ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों के उत्पादन में जुलाई 2026 में 5.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देता है। कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि दर पिछले साल जुलाई 2025 की 3.2 फीसदी की वृद्धि से काफी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी देखी गई है। सरकार ने हाल ही में आधार वर्ष में बदलाव किया है और एक नए क्षेत्र को भी इसमें जोड़ा है।
क्या है बुनियादी क्षेत्रों की ताजा वृद्धि दर?
जुलाई 2026 में नौ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर 5.4 फीसदी रही। यह वृद्धि देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पिछले साल जुलाई 2025 में इन क्षेत्रों की वृद्धि दर 3.2 फीसदी थी। वहीं, जून 2026 में यह वृद्धि 6 फीसदी दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है।
किन क्षेत्रों में दिखी तेजी और कहां आई गिरावट?
जुलाई में कोयला उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। रिफाइनरी उत्पादों, सीमेंट और बिजली के उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही, लौह अयस्क के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इन सभी क्षेत्रों ने मिलकर कुल वृद्धि दर को बढ़ाने में मदद की है। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक के उत्पादन में इस महीने गिरावट आई है। इन क्षेत्रों में आई कमी समग्र वृद्धि पर थोड़ा असर डाल सकती है।
आधार वर्ष में बदलाव और नए क्षेत्र का क्या मतलब है?
जून 2026 से जारी किए गए आंकड़ों के लिए एक नया आधार वर्ष लागू किया गया है। अब 2011-12 के बजाय 2022-23 को आधार वर्ष माना जा रहा है। इस बदलाव से आर्थिक आंकड़ों की गणना अधिक सटीक और वर्तमान स्थिति के अनुरूप हो सकेगी। सरकार ने इस सूचकांक में लौह अयस्क को भी शामिल किया है, जिससे अब प्रमुख क्षेत्रों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। अप्रैल से जुलाई 2026-27 की अवधि के दौरान, इन प्रमुख क्षेत्रों में कुल 4.3 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि केवल 1.5 फीसदी थी।