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केयरएज: भारत की डिजिटल क्रांति का डंका: दुनिया के 10 सबसे असरदार सुधारों में शामिल डीपीआई, रिपोर्ट में दावा

Fri, 16 Oct 2026 08:07 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) दुनिया के 10 सबसे असरदार सुधारों में शामिल हो गया है। जानिए यूपीआई, आधार और एमएसएमई सेक्टर पर इसके प्रभाव का पूरा विश्लेषण। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
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दुनिया में भारत के डीपीआई का जलवा। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) ने वैश्विक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा विश्व के 10 सबसे प्रभावी संरचनात्मक सुधारों में शामिल हो गया है। दुनिया के 38 देशों के 43 प्रमुख सुधार मामलों के गहन विश्लेषण के बाद जारी इस रिपोर्ट ने यह साबित किया है कि भारत के डिजिटल ढांचे ने सेवाओं की पहुंच का विस्तार करने के साथ-साथ लेनदेन की लागत घटाई है और वित्तीय समावेशन व औपचारिकीकरण को नई गति दी है।

भारत के डिजिटल ढांचे को दुनिया के शीर्ष सुधारों में क्यों शामिल किया गया?

केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा वैश्विक स्तर पर सबसे असरदार संरचनात्मक बदलावों में से एक बनकर उभरा है। इस सफलता के पीछे सबसे मुख्य वजह एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के लेनदेन का लगातार बढ़ता दायरा और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाया जाना है। भारत के इस डिजिटल बुनियादी ढांचे ने आम जनता तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच को बेहद आसान और सुलभ बना दिया है। इससे न केवल हर स्तर पर लेनदेन की लागत में कमी आई है, बल्कि देश में वित्तीय समावेश और असंगठित अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण को अभूतपूर्व मजबूती मिली है।

आधार और यूपीआई के नेटवर्क का दायरा और क्षमता कितनी बड़ी है?

रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़े भारत के डिजिटल भुगतान और पहचान तंत्र के विशाल आकार व क्षमता को दर्शाते हैं:

  • आधार प्रणाली की व्यापकता: रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आधार प्रणाली 13 लाख से अधिक लोगों को कवर करती है, जो देश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी के बराबर है।
  • यूपीआई की मासिक क्षमता: भारत का यूपीआई नेटवर्क हर महीने 13 अरब (13 बिलियन) से अधिक लेनदेन को सफलतापूर्वक संसाधित करता है। यह आंकड़ा देश के पेमेंट नेटवर्क की विशालता और जन-सामान्य के भरोसे को उजागर करता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में डिजिटल कारोबार की क्या स्थिति है?

इस डिजिटल क्रांति का सबसे सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर पड़ा है। रिपोर्ट बताती है कि एमएसएमई क्षेत्र में डिजिटल लेनदेन की गति तेजी से बढ़ी है और अब यह उनके कुल लेनदेन का 85 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। छोटे और मध्यम व्यापारियों द्वारा इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल माध्यमों को अपनाना यह दर्शाता है कि देश का कारोबारी ढांचा तेजी से औपचारिक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत हो रहा है।

भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे की सफलता के पीछे कौन से मुख्य कारक रहे हैं?

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में संस्थागत समन्वय और अंतरसंचालनीयता को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सफलता के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में पहचाना गया है। सरकारी एजेंसियों, वित्तीय नियामकों, बैंकों, भुगतान नेटवर्क और फिनटेक कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल और रणनीतिक सहयोग ने इस अत्याधुनिक डिजिटल ढांचे को विकसित करने और मजबूत बनाने में प्राथमिक भूमिका निभाई है।

भविष्य के सुधारों और टिकाऊ विकास के लिए रिपोर्ट में क्या दिशा दिखाई गई है?

रिपोर्ट में भविष्य की उभरती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए नए सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में प्रगति, डिजिटल बुनियादी ढांचे की बढ़ती आवश्यकताओं, जलवायु जोखिमों, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर सुधार की बात कही गई है। रिपोर्ट का स्पष्ट निष्कर्ष है कि केवल सुधारों की घोषणा कर देना ही पर्याप्त नहीं है। टिकाऊ और स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए एक सुसंगत नीतिगत रूपरेखा, सुधारों का सही क्रम निर्धारण, स्पष्ट जनादेश, राजनीतिक प्रतिबद्धता और नीतिगत स्थिरता का होना अनिवार्य है।

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