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Succession:उत्तराधिकार से बदलता भारत का कॉर्पोरेट चेहरा,मुख्य भूमिका में अगली पीढ़ी; रिलायंस की नीति चर्चा में

Thu, 24 Jul 2025 06:01 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

फाइनेंशियल टाइम्स, इकनॉमिक टाइम्स और ब्लूमबर्ग जैसे मीडिया स्रोतों ने इसे भारत के बड़े औद्योगिक घरानों रिलायंस, टाटा, अदाणी और महिंद्रा में नेतृत्व परिवर्तन की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। रिपोर्ट इस बदलाव की गहराई को समझने, विभिन्न मॉडल की तुलना करने और यह जानने का प्रयास है कि भारत का अगला कॉरपोरेट नेतृत्व कैसा होगा। उसकी वैश्विक साख कैसी बन रही है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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बड़े औद्योगिक घरानों में उत्तराधिकार की प्रक्रिया से भारत का कॉरपोरेट चेहरा बदल रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से अनंत अंबानी को न्यू एनर्जी और पेट्रोकेमिकल कारोबार की कमान सौंपे जाने के बाद भारत के कॉरपोरेट परिदृश्य में उत्तराधिकार रणनीति फिर चर्चा में है।

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फाइनेंशियल टाइम्स, इकनॉमिक टाइम्स और ब्लूमबर्ग जैसे मीडिया स्रोतों ने इसे भारत के बड़े औद्योगिक घरानों रिलायंस, टाटा, अदाणी और महिंद्रा में नेतृत्व परिवर्तन की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। रिपोर्ट इस बदलाव की गहराई को समझने, विभिन्न मॉडल की तुलना करने और यह जानने का प्रयास है कि भारत का अगला कॉरपोरेट नेतृत्व कैसा होगा। उसकी वैश्विक साख कैसी बन रही है। उत्तराधिकार अब पारिवारिक परंपरा से आगे बढ़कर रणनीतिक और राष्ट्रीय नीति का अंग कैसे बन रहा है। रिलायंस ने आकाश और अनंत अंबानी को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपकर साफ संकेत दे दिया है कि अगली पीढ़ी अब कंपनी संचालन की मुख्यधारा में आ चुकी है। यह कदम कॉरपोरेट रणनीति, ब्रांड निर्माण और वैश्विक निवेशकों की धारणा के लिहाज से भी निर्णायक माना जा रहा है।

सांस्कृतिक छवि गढ़ने की रणनीति
रिलायंस परिवार अनंत अंबानी की छवि को धार्मिक, पारंपरिक और जनसामान्य से जुड़ी बनाने पर काम कर रहा है। उनकी शादी में तुलसी विवाह और शास्त्रीय संगीत जैसे प्रतीकों को प्रचारित किया गया। आकाश का प्रोफाइल ग्लोबल कॉरपोरेट स्ट्रैटेजिस्ट जैसा है। सिलिकॉन वैली नेटवर्क और वैश्विक निवेश साझेदारों से जुड़ा हुआ। यह दोहरा चेहरा रिलायंस को भारतीय संस्कृति व पूंजी के बीच सांस्कृतिक ब्रिज के रूप में पेश करता है।
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रिलायंस की रणनीति चर्चा के केंद्र में
रिलायंस, टाटा, अदाणी और महिंद्रा अगली पीढ़ी के उत्तराधिकार मॉडल को विशिष्ट तरीकों से अपना रहे हैं। रिलायंस की रणनीति चर्चा का केंद्र है। मुकेश अंबानी ने अगली पीढ़ी को जिम्मा सौंपने की प्रक्रिया को सार्वजनिक, क्रमबद्ध और विभाग विशिष्ट बना दिया है। आकाश के पास जियो इन्फोकॉम और अनंत के पास न्यू एनर्जी एवं पेट्रोकेमिकल की कमान है। ईशा अंबानी रिटेल और उपभोक्ता कारोबार की प्रमुख हैं। कॉरपोरेट दृष्टिकोण से देखें तो रिलायंस ने उत्तराधिकार को संस्थान के भीतर वर्टिकल विशेषज्ञता के रूप में बांट दिया है, जिसमें हर उत्तराधिकारी को एक अलग साम्राज्य संभालना है। यह संरचना प्रगतिशील और रणनीतिक मानी जा रही है।  

  •  रिलायंस की अगली पीढ़ी को डिजिटल इंडिया, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और 5जी आत्मनिर्भरता जैसे अभियानों के जरिये भारत सरकार की प्रमुख नीतियों से जुड़ने का मौका भी मिला है।
  •  सीएनएन विश्लेषक फरीद जकारिया कहते हैं, आधुनिक लोकतंत्रों में कॉरपोरेट अब राजनीतिक वंशों की तरह दिखने लगे हैं। वे एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं।
  •  फाइनेंशियल टाइम्स में निवेशक रुचिर शर्मा कहते हैं, उभरते बाजारों में अरबपतियों की सफलता सत्ता के साथ उनके मेलजोल पर निर्भर करती है। 


देश के अन्य कॉरपोरेट घरानों से तुलना
रिलायंस की रणनीति जानने के लिए जरूरी है कि उसकी टाटा, अदाणी और महिंद्रा जैसे घरानों से तुलना की जाए। टाटा समूह में उत्तराधिकार बोर्ड ने तय किया है। रतन टाटा के बाद सायरस मिस्त्री और एन चंद्रशेखरन जैसे पेशेवर चेयरमैन बने। यह मॉडल पारदर्शिता-योग्यता आधारित चयन का उदाहरण है। अदाणी समूह में गौतम अदाणी की अपने पुत्र करण अदाणी को नेतृत्व सौंपने की प्रक्रिया पारिवारिक नियंत्रण को दर्शाता है।  महिंद्रा समूह ने मिश्रित मॉडल अपनाया है, जिसमें आनंद महिंद्रा चेयरमैन बने रहें और सीईओ पद पेशेवरों को सौंपा गया। 

 वैशि्वक निवेशकों की नजर में उत्तराधिकार मॉडल
 टाटा समूह में सर्वाधिक पारदर्शिता दिखती है, जिसे ईएसजी (एनवायरमेंटल, सोशल, गवर्नेंस) मानकों में भी सबसे भरोसेमंद माना जाता है। महिंद्रा समूह में सामाजिक जिम्मेदारी और पेशेवर प्रबंधन दोनों मौजूद हैं। रिलायंस ने उत्तराधिकार प्रक्रिया को सार्वजनिक व स्पष्ट बनाकर अपनी पारदर्शिता को मजबूत किया है। अदाणी समूह को हिंडनबर्ग रिपोर्ट जैसी घटनाओं के बाद जवाबदेही और खुलापन बढ़ाने की जरूरत है।

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