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Amitabh Kant: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की 6.6% की वृद्धि दर बड़ी उपलब्धि, बोले नीति आयोग के पूर्व सीईओ

Thu, 07 May 2026 08:37 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

वैश्विक युद्ध, महंगाई और सप्लाई चेन संकट के बीच भारत की 6.6% जीडीपी ग्रोथ को अमिताभ कांत ने बड़ी उपलब्धि बताया। जानिए ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और अर्थव्यवस्था पर उनका पूरा बयान।
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अमिताभ कांत, नीति आयोग के पूर्व सीईओ - फोटो : ANI
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विस्तार
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नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की 6.6% जीडीपी वृद्धि दर एक मजबूत उपलब्धि है। उनका कहना है कि दुनिया इस समय युद्ध, बढ़ती तेल कीमतों, टूटती सप्लाई चेन और संरक्षणवाद जैसी समस्याओं से जूझ रही है, फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत की सोच कार्यक्रम के दौरान बातचीत में अमिताभ कांत ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां असाधारण हैं और ऐसे समय में 6.6% ग्रोथ हासिल करना भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है। 

वैश्विक हालात से बढ़ी अनिश्चितता

कांत ने कहा कि दुनिया में इस समय बड़े स्तर पर संघर्ष चल रहे हैं। कई देशों में युद्ध की स्थिति है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके अलावा टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है। 

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उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जो संरचनात्मक सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश किए हैं, उनका फायदा आने वाले दशकों में मिलेगा। उनका मानना है कि हालात सामान्य होने पर भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। 

ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ाना होगा फोकस

अमिताभ कांत ने कहा कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम करना होगा। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली भंडारण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि देश को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ऑफशोर विंड और कंसंट्रेटेड सोलर पावर जैसे क्षेत्रों में मिशन मोड में काम करना चाहिए। साथ ही बिजली और ईवी सेक्टर के लिए स्टोरेज क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। 

तेल कीमतों से महंगाई पर दबाव

कांत ने माना कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारत पर पड़ रहा है क्योंकि देश बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधन आयात करता है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार ने उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय इन झटकों को खुद संभालने का फैसला किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पश्चिम एशिया में शांति बहाल होने और युद्ध खत्म होने पर तेल कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे महंगाई का दबाव भी कम होगा। 

सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता जरूरी

अमिताभ कांत ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने सेमीकंडक्टर पीएलआई योजना को सबसे परिवर्तनकारी योजनाओं में से एक बताया। 

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कांत के मुताबिक, भारत में 12 कंपनियां सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में काम कर रही हैं, जो रक्षा, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए अहम साबित होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में चिप निर्माण वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनेगा और भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 

आगे क्या?

कांत का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम होते हैं और ऊर्जा कीमतों में नरमी आती है, तो भारत की विकास दर को और मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि दीर्घकाल में भारत को ऊर्जा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने पर फोकस करना होगा।

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