अप्रैल महीने में देश की विनिर्माण गतिविधियों में मामूली सुधार दर्ज किया गया। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में इसकी जानकारी मिली। लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच नए ऑर्डर और आउटपुट की रफ्तार आठ माह में सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ा। आईएचएस मार्किट ने सोमवार को भारत विनिर्माण खरीद प्रबंध सूचकांक (पीएमआई) जारी किया।
अप्रैल 2021 के लिए 55.5 पर रहा पीएमआई
यह अप्रैल 2021 के लिए 55.5 पर रहा, जो कि मार्च 2021 के 55.4 से थोड़ा ऊपर है। यदि पीएमआई 50 से अधिक हो तो इससे गतिविधियों में तेजी का पता चलता है। पीएमआई के 50 से कम रहने का अर्थ संकुचन का संकेत देता है।
आईएचएस मार्किट में अर्थशास्त्र की सहायक निदेशिका पॉलिएना डी लीमा ने कहा कि, 'कोविड-19 संकट के बीच अप्रैल के पीएमआई नतीजे नए ऑर्डर और उत्पादन की वृद्धि दर में गिरावट को दर्शाते हैं।' उन्होंने कहा कि कोविड-19 संक्रमण का प्रकोप बढ़ने से मांग में और गिरावट आ सकती है, जबकि कंपनियां पहले ही वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी की बाधा का सामना कर रही हैं।
विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से अप्रैल में निकाले इतने पैसे
मालूम हो कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों में छह महीने से जारी खरीददारी का दौर अप्रैल में थम गया। विदेशी निवेशक अप्रैल माह में शुद्ध बिकवाल रहे और माह के दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजारों से 9,659 करोड़ रुपये की निकासी की। भारत में कोरोना वायरस की गंभीर लहर और उसके अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने अपना यह रुख बदला। माईवेल्थग्रोथ.कॉम के सह संस्थापक हर्षद चेतनवाला के अनुसार विदेशी निवेशकों में कोविड-19 संकट का भय यदि बढ़ता है तो विदेशी निवेशकों के अपनी हिस्सेदारी बेचने का चलन जोर पकड़ सकता है और बाजार में थोड़ी और उथल-पुथल आ सकती है।