भारत अब 6जी पेटेंट दाखिल करने वाले दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल हो गया है। केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बुधवार को कहा, भारत के पास प्रतिभाओं का विशाल भंडार और पर्याप्त समय है। 6जी में भारत के अग्रणी नहीं बनने का कोई कारण नजर नहीं आता है।
भारत 5जी के बाद अब 6जी तकनीक की दिशा में भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। खास बात है कि भारत अब 6जी पेटेंट दाखिल करने वाले दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल हो गया है।
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केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बुधवार को कहा, भारत के पास प्रतिभाओं का विशाल भंडार और पर्याप्त समय है। 6जी में भारत के अग्रणी नहीं बनने का कोई कारण नजर नहीं आता है। भारत 6जी-2025 सम्मेलन में मंत्री ने कहा, 6जी टेराहर्ट्ज आवृत्ति बैंड का उपयोग करेगा, जिससे डाटा हासिल करने की दर एक टेराबिट प्रति सेकंड होगी। यह रफ्तार 5जी की तुलना में 100 गुना तेज है। उन्होंने कहा, भारत में 111 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को 300 करोड़ रुपये की मंजूरी राशि के साथ वित्तपोषित किया गया है। मंत्री ने कहा, भारत जैसे-जैसे वैश्विक प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनने की दिशा में अपनी यात्रा जारी रखेगा, वैसे-वैसे 6जी प्रौद्योगिकी के साथ इसका आगे का रास्ता आने वाले दशकों के लिए देश की समृद्धि को परिभाषित करेगा। स्वदेशी 6जी का विकास यह सुनिश्चित करेगा कि हमारा संचार भारत में ही विकसित हो और पूरी तरह सुरक्षित रहे।
एक लाख करोड़ डॉलर बढ़ जाएगी अर्थव्यवस्था
केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री ने कहा, 6जी पूरी तरह से नए उद्योगों का निर्माण करेगा और मौजूदा व्यवसायों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इस क्रांतिकारी परिवर्तन से 2035 तक देश की अर्थव्यवस्था में संभावित रूप से एक लाख करोड़ डॉलर का इजाफा होगा। उन्होंने आगे कहा, हमें एक ऐसे 6जी तंत्र का निर्माण करना है, जो भारत में बना हो और दुनिया भी इसका इस्तेमाल कर पाए। यह डिजाइन के मोर्चे पर पूरा सुरक्षित हो और प्रभाव में परिवर्तनकारी हो।