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साझेदारी: भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, डेटा सेंटर में निवेश पर की चर्चा, जानिए क्या अपडेट

Fri, 16 Oct 2026 07:18 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, नई दिल्ली

सार

भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और डेटा केंद्र जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर चर्चा की। निर्मला सीतारमण और JBIC गवर्नर काज़ुहिको अमाकावा ने 600 मिलियन डॉलर के इंडिया-जापान फंड के फॉलो-ऑन फंड की संभावना पर बात की।
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वित्त मंत्री - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत को वर्ष 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र ('विकसित भारत') बनाने के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब सिर्फ केंद्र और राज्य स्तर की नीतियां ही काफी नहीं होंगी, बल्कि प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों की आंच को देश की सबसे जमीनी इकाइयों तक पहुंचाना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकॉक (थाईलैंड) में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर 'अटलांटिक काउंसिल' के साथ आयोजित एक संवाद में यह स्पष्ट संदेश दिया है। वित्त मंत्री के अनुसार, जब तक देश की नगर पालिकाहों और ग्राम पंचायतों को सक्षम व जवाबदेह नहीं बनाया जाता, तब तक आर्थिक बदलाव की रफ्तार को गति देना संभव नहीं है।

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इसके अलावे भारत और जापान ने आर्थिक व वित्तीय सहयोग को गहरा करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दोनों देशों ने 600 मिलियन डॉलर के इंडिया-जापान फंड के फॉलो-ऑन फंड की संभावना पर विचार किया। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश विस्तार पर चर्चा हुई।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बैंकॉक, थाईलैंड में वर्ल्ड बैंक-आईएमएफ की वार्षिक बैठकों के दौरान काजुहिको अमाकावा से मुलाकात की। अमाकावा जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में कई रणनीतिक उद्योगों में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।

किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा?

चर्चा स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा परिवर्तन और उन्नत विनिर्माण पर केंद्रित रही। सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी प्रमुख विषय थे। लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर भी बात हुई। इंडिया-जापान फंड और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) में जापानी भागीदारी के माध्यम से यह सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश उभरती प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढांचा में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा केंद्र के अवसर शामिल हैं।

इंडिया-जापान फंड की सफलता और आगे की क्या योजना?

अमाकावा ने इंडिया-जापान फंड की सफलता पर प्रकाश डाला। इस फंड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायोएथेनॉल में निवेश किया है। उन्होंने एक फॉलो-ऑन फंड की उम्मीद भी जताई। यह फंड दोनों देशों के बीच निवेश सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करता है। संभावित फॉलो-ऑन फंड ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग का दायरा दर्शाता है। अमाकावा ने नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कोऑपरेशन (एनआईसीडीसी) में जीबीआईसी की हिस्सेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने गुजरात के धोलेरा सहित भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ती जापानी रुचि को रेखांकित किया।

भारत के छोटे शहरों में निवेश के क्या अवसर?

निर्मला सीतारमण ने टियर 2 और टियर 3 शहरों में जापानी निवेश को प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशाखापत्तनम जैसे शहरों में डेटा केंद्र में निवेश का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य संतुलित शहरी वृद्धि को बढ़ावा देना है। छोटे शहरों पर ध्यान केंद्रित करने से डिजिटल बुनियादी ढांचा में निवेश का भौगोलिक विस्तार हो सकता है। यह स्थापित औद्योगिक और टेक्नोलॉजी केंद्र में अवसरों के साथ-साथ महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, क्रिटिकल मिनरल्स और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग पर भी बात की। ये क्षेत्र विनिर्माण और ऊर्जा परिवर्तन की प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-जापान के आर्थिक और वित्तीय सहयोग को गहरा करने की क्षमता को पहचाना। उन्होंने एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने पर भी जोर दिया।

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