खनन क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण जुलाई 2026 में भारत की औद्योगिक विकास दर धीमी पड़ गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत पर आ गई। इससे ठीक एक महीने पहले, यानी जून 2026 में यह आंकड़ा 8.8 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर था। हालांकि, खनन में आई इस गिरावट के बावजूद विनिर्माण और बिजली क्षेत्र के बेहतरीन प्रदर्शन ने भारतीय उद्योग की रफ्तार को बड़े झटके से बचा लिया।
खनन क्षेत्र के खराब प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता
जुलाई महीने के आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू खनन और उत्खनन क्षेत्र का प्रदर्शन रहा। इस क्षेत्र में (-)0.9 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह गिरावट इसलिए भी ज्यादा महसूस हो रही है क्योंकि एक साल पहले जुलाई 2025 में माइनिंग क्षेत्र ने 10.7 प्रतिशत की जोरदार रफ्तार दर्ज की थी। खनन गतिविधि में आई इस सुस्ती ने पूरे आईआईपी की रफ्तार को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
विनिर्माण और बिजली क्षेत्र ने संभाला मोर्चा
माइनिंग की सुस्ती के बावजूद देश के कुल औद्योगिक उत्पादन को विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र से बड़ा संबल मिला।
विनिर्माण क्षेत्र: इस क्षेत्र ने 7.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की। विनिर्माण के कुल 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 19 में सकारात्मक ग्रोथ देखी गई, जो घरेलू मांग की मजबूती को दर्शाती है।
बिजली एवं गैस आपूर्ति: इस क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिससे औद्योगिक गतिविधियों में बिजली की बढ़ती खपत का पता चलता है।
जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन: जल आपूर्ति, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े क्षेत्र ने 7.4 प्रतिशत की स्थिर और मजबूत बढ़त हासिल की।
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किन उद्योगों में दिखी सबसे तेज तेजी?
जुलाई 2026 के दौरान तीन प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों ने सबसे शानदार प्रदर्शन करके पूरी ग्रोथ को आगे बढ़ाया।
इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट: इस क्षेत्र में 28.3 प्रतिशत की सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की गई। इसमें मुख्य रूप से यूपीएस , सॉलिड-स्टेट ड्राइव और ऑप्टिकल फाइबर केबल के कनेक्टर्स की भारी मांग का योगदान रहा।
मोटर वाहन और ट्रेलर्स: ऑटोमोबाइल क्षेत्र 22.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा। इस बढ़ोतरी में पैसेंजर कारों, कमर्शियल गाड़ियों और ऑटो कंपोनेंट्स (स्पेयर पार्ट्स) की बिक्री का अहम हाथ रहा।
मशीनरी एवं उपकरण: इस उद्योग समूह ने 12.1 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण
औद्योगिक सामान के उपयोग के आधार पर आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पूंजीगत निवेश और कंज्यूमर मार्केट की क्या स्थिति है:-
कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तुएं): 16.1 प्रतिशत की बंपर ग्रोथ, जो यह संकेत देती है कि कंपनियों का निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार मजबूत है।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (टिकाऊ सामान): 10.5 प्रतिशत की तेजी, यानी गाड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान खूब बिक रहे हैं।
इंटरमीडिएट गुड्स (मध्यवर्ती वस्तुएं): 10.0 प्रतिशत की वृद्धि।
इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कंस्ट्रक्शन सामान: 6.9 प्रतिशत की बढ़त।
प्राइमरी गुड्स (प्राथमिक वस्तुएं): 4.1 प्रतिशत की ग्रोथ।
कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स (गैर-टिकाऊ सामान): (-)1.0 प्रतिशत की गिरावट, जो दैनिक उपभोग की वस्तुओं (एफएमसीजी) की सुस्त मांग की तरफ इशारा करती है।
संशोधित आंकड़े और ऐतिहासिक तुलना
एनएसओ ने अपने इस बुलेटिन में जून 2026 के अंतिम आंकड़ों को संशोधित भी किया है। जून के लिए पहले जारी 7.3 प्रतिशत के अनुमान को बढ़ाकर अब 8.8 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर पिछले साल की बात करें, तो जुलाई 2025 में आईआईपी ग्रोथ 5.4 प्रतिशत थी, जिसके मुकाबले जुलाई 2026 का 6.7 प्रतिशत का आंकड़ा अभी भी बेहतर स्थिति में माना जाएगा।