भारत सरकार के वाणिज्य सचिव के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बहुत जल्द हो सकता है, लेकिन अभी इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं की जा सकती है। इस बयान से व्यापारियों और निवेशकों को काफी राहत मिली है, लेकिन अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद देश ने अमेरिका के बाजारों पर अपनी निर्भरता कम किया है और भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है। इसके लिए कई यूके, नीदरलैंड, ओमान और छोटे देशों के साथ व्यापार समझौते किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारत के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी टैरिफ लागू होने से पहले 22.5 थी, जो टैरिफ शुल्क लागू होने के बाद घटकर 17.8 प्रतिशत रह गई है। इसके विपरीत संयुक्त अरब अमीरात, चीन, सऊदी अरब, स्पेन और हांगकांग जैसे बाजारों में वृद्धि दर्ज की गई, जो भारतीय निर्यातकों द्वारा प्रभावी व्यापार के लिए प्रमुख बाजार बनते नजर आ रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है, पारंपरिक यूरोपीय व्यापारिक साझेदारों ने कारोबार को स्थिर बनाए रखने मदद की है। जर्मनी, इटली, और स्पेन जैसे देशों में मामूली वृद्धि ने नीदरलैंड और ब्रिटेन में देखी गई। जिसने टैरिफ लागू होने के बाद आई नरमी को संतुलित करने में मदद की है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, कार्बनिक रसायन और इंजीनियरिंग उत्पाद निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ी है। इसके साथ ही समुद्री उत्पादों जिन पर टैरिफ लागू है, उनके निर्यात की हिस्सेदारी में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकते देती है कि भारत का निर्यात विविधीकरण, मूल्यवर्धन और क्षेत्रीय मजबूती के जरिए बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश के अनुकूल रूप से ढल रहा है और बाहरी चुनौतियों के बाद भी विकास की गति को लगातार बढ़ा रहा है।