वैश्विक सहयोग और समावेशी विकास का आह्वान करने के साथ भारत लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले डिजिटलीकरण की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा। डिजिटल क्षेत्र में भारत की इस धमक की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है।
केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) को एक ऐसी ताकत बनाया है, जिसे अब कोई रोक नहीं सकता। डीपीआई ने इस क्षेत्र में बड़ी तकनीकी कंपनियों के दबदबे को खत्म कर दिया। इसमें नए मुक्त स्रोत, उपभोक्ता केंद्रित प्रयासों व गैर-मध्यस्थ के लिए नई राहें खुली हैं।
आईटी राज्य मंत्री ने 9-10 सितंबर को होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पूर्व एक साक्षात्कार में कहा, भारत अपने डीपीआई को हर नागरिक के लिए एक मुख्य स्रोत के रूप में विकसित कर रहा है। जब एक अरब से अधिक भारतीय इसका इस्तेमाल कर रहे हों तो इसका विरोध कौन कर सकता है?
अमिट छाप छोड़ेगी भारत की जी-20 अध्यक्षता भारत की जी-20 अध्यक्षता मजबूत संदेशों के साथ अमिट छाप छोड़ेगी। भारत ने वैश्विक हित को हमेशा ऊपर रखा है। यह जिम्मेदार आचरण का उदाहरण है, जिसे सभी बड़े देशों को अपनाना चाहिए। पर, कुछ देश ऐसा नहीं करते। -राजीव चंद्रशेखर, केंद्रीय मंत्री
यूपीआई से डिजिटल भुगतान तंत्र में आई क्रांति
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में क्रांति ला दी है। इसने उन लाखों व्यक्तियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाकर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसने पास बैंक खाते नहीं थे।
n दास ने कहा, देश में 70 से अधिक मोबाइल एप व 5 करोड़ से अधिक व्यापारी यूपीआई भुगतान स्वीकार करते हैं।
भारत के पास खिलौना क्षेत्र में अपार संभावनाएं
भारत के पास खिलौना क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। देश के पास वैश्विक बाजार की मांगों को पूरा करने के लिए कुशल कार्यबल और प्रौद्योगिकी दोनों हैं। घरेलू खिलौना उद्योग अमेरिका व चीन जैसे जी-20 सदस्य देशों की विशेषज्ञता से सीख सकता है। इससे विनिर्माण क्षमता व निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनु गुप्ता ने कहा,भारत की जी-20 अध्यक्षता उसे एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करने का अवसर प्रदान करती है। हम अमेरिका से खिलौनों की प्रति व्यक्ति खपत में सुधार कैसे करें, यह सीख सकते हैं। दुनिया की खिलौना फैक्टरी चीन से भारत निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी मौजूदा ताकत का लाभ उठाना सीख सकता है।
-अधिकतर जी-20 देश खिलौनों के शुद्ध आयातक हैं। यह घरेलू कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है।
-2022 में भारत के व्यापारिक निर्यात में जी-20 देशों की हिस्सेदारी 64 फीसदी और आयात में 52.4 फीसदी थी।