केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चीन और आसियान को भारतीय वस्तुओं व सेवाओं के बड़े बाजार के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई। भारत चिली, कनाडा और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते आगे बढ़ा रहा है।
जिस चीन से भारत हर साल 130 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान खरीदता है और जिसके साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है, उसी चीन को अब भारत अपना बड़ा बाजार बनाने के लिए कमर कस रहा है।
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हेग में भारतीय पत्रकारों से बातचीत में उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत चीन और आसियान क्षेत्र को वस्तुओं और सेवाओं का बड़ा निर्यातक बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि भारत पारस्परिक आधार पर दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार खुलवाना चाहता है।
यह बयान इसलिए भी गौर करने लायक है कि पिछले साल लंदन में गोयल ने भारत-आसियान व्यापार समझौते को बेतुका बताते हुए आसियान को चीन की बी टीम कहा था, जिस पर खासा विवाद हुआ था। अब वही आसियान और चीन भारत के निर्यात के बड़े ठिकाने के रूप में उनकी नजर में हैं। लेकिन किसी उत्पाद में अगर निष्पक्षता या कीमत ठीक नहीं पाई जाती तो उसके लिए तय न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है और वह अपना काम करती है।
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प्रतिभा नहीं, काम आएगा भारत
गोयल ने कहा, भारतीय प्रतिभा को विदेश ले जाने के बदले काम को ही भारत भेजना कोविड के समय की सीख है। युवाओं की कमी झेल रहे देश समझ गए हैं कि भारत में काम भेजना सस्ता भी है और कारगर भी। भारत को इसका दोहरा फायदा है, विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ती है। यहां काम करने वाले विदेश में अकेले रहने के बजाय अपने परिवार के साथ रहते हैं। इसलिए जितने ज्यादा वैश्विक क्षमता केंद्र भारत आएं, उतना बेहतर।
पुराने समझौतों से सबक
गोयल ने कहा कि पहले के समझौतों में शायद उद्योग और हितधारकों से उतनी सलाह नहीं हुई, जिससे संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित रहें और भारत के आक्रामक हित पूरे हों। इसीलिए उद्योग जगत में उन पुराने समझौतों को लेकर आज अच्छी भावना नहीं दिखती। अब बड़े पैमाने पर परामर्श होता है और समझौते के बाद बड़े प्रतिनिधिमंडल भेजकर मौके खोले जाते हैं। पिछले तीन साल में व्यापार वार्ता के लिए बाकायदा नियमावली तैयार की गई है और हर समझौते का दस्तावेजीकरण होता है, ताकि अधिकारी बदलें तो भी सीख न खोए।
चिली के साथ भी होने को है समझौता
चीन के साथ गोयल ने आगे के व्यापार समझौतों का पूरा पत्ता भी खोल दिया। अमेरिका के अलावा आठ नए समझौतों की कतार पर उन्होंने कहा कि चिली के साथ समझौता पूरा होने को है और कनाडा से वार्ता अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। मेक्सिको जल्द शुरुआती समझौता चाहता है। दक्षिण अफ्रीका की अगुवाई वाले दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ यानी साकू के साथ वार्ता अभी शुरू हुई है, इसलिए उसमें वक्त लगेगा। बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका वाले इस समूह के साथ भारत ने अगस्त में तरजीही व्यापार समझौते की औपचारिक बातचीत की शर्तों पर दस्तखत किए थे।
दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के साथ मौजूदा तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की बातचीत चुनाव संपन्न होने और सरकार की निरंतरता के बाद तेज हो सकती है। खाड़ी सहयोग परिषद के साथ बातचीत, जिससे खाड़ी के चार और देश जुड़ेंगे, और इस्राइल के साथ बातचीत में पश्चिम एशिया संकट के कारण वक्त लग सकता है, हालांकि भारत रफ्तार बढ़ाने को तैयार है।