ट्रंप के टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात वित्त वर्ष 2026 में 30 प्रतिशत गिरकर 60.6 अरब डॉलर पर आ सकता है। वित्त वर्ष 2025 में यह 86.5 अरब डॉलर दर्ज हुआ था। यह चेतावनी थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने सोमवार को दी। भारत पर ट्रंप ने 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है और यह 7 अगस्त से लागू हो जाएगा।
जीटीआरआई ने दिया सुझाव
जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को ब्याज समकारी योजना को पुनर्जीवित, साथ ही एक हेल्पडेस्क बनाने, व्यापार समझौते का रणनीतिक उपयोग करने और नए निर्याकतों को शामिल करने की जरूरत है।
इसके अलावा पिछले साल बंद की गई ब्याज समानता योजना को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। थिंक टैंक ने सुझाव दिया है कि इस योजना को 15,000 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट और पांच साल की प्रतिबद्धता के साथ फिर से लागू किया जाए, ताकि निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को रियायती दर पर ऋण मिल सके।
उच्च टैरिफ से बचाने के लिए निर्यातकों को ब्याज सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन दे सकती है सरकार
अमेरिकी टैरिफ के असर से कपड़ा और रसायन जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों को बचाने के लिए सरकार ब्याज सब्सिडी एवं अन्य राजकोषीय प्रोत्साहन दे सकती है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया, वाणिज्य मंत्रालय ने इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और कृषि सहित कई क्षेत्रों के निर्यातकों संग बैठकें की हैं ताकि टैरिफ से जुड़ी समस्याओं को समझा जा सके। इसके तहत, सरकार समर्थन उपायों पर काम कर रही है।
अधिकारी ने बताया, खाद्य, समुद्री और वस्त्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों ने 25 फीसदी टैरिफ से निपटने के लिए केंद्र से वित्तीय मदद एवं किफायती कर्ज देने का अनुरोध किया है। निर्यातकों ने ब्याज सब्सिडी, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क-टैक्स में छूट (आरओडीटीईपी) और राज्य-केंद्रीय करों व शुल्क रियायत जैसी योजनाओं के तहत बकाया राशि का समय पर भुगतान के साथ अमेरिका के लिए सीधे निर्यात जैसे राजकोषीय प्रोत्साहनों के विस्तार की भी अपील की है। मंत्रालय समर्थन के लिए राज्यों के साथ बातचीत भी करेगा।