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US Tariffs: अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात में 30 फीसदी गिरावट की आशंका, GTRI ने बचाव के लिए दिए ये सुझाव

Mon, 04 Aug 2025 06:44 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जीटीआरआई ने चेतावनी दी कि ट्रंप के उच्च टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात में 30 फीसदी की गिरावट की संभावना है। इसमें कहा गया कि कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में भारतीय निर्यात स्पष्ट रूप से नुकसान में है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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ट्रंप के टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात वित्त वर्ष 2026 में 30 प्रतिशत गिरकर 60.6 अरब डॉलर पर आ सकता है। वित्त वर्ष 2025 में यह 86.5 अरब डॉलर दर्ज हुआ था।  यह चेतावनी थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने सोमवार को दी। भारत पर ट्रंप ने 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है और यह 7 अगस्त से लागू हो जाएगा। 

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ये भी पढ़ें: Tariffs Row: ट्रेड यूनियन और किसान अमेरिकी टैरिफ व भारत-ब्रिटेन सीईटीए का करेंगे विरोध, प्रदर्शन 13 अगस्त को

कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में होगा नुकसान
इसमें कहा गया कि कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में भारतीय निर्यात स्पष्ट रूप से नुकसान में है। नई अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में  फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा उत्पाद, महत्वपूर्ण खनिज और सेमीकंडक्टर शामिल नहीं हैं।
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किस क्षेत्र में कितना होगा नुकसान?

  • बुने हुए और बुने हुए वस्त्र जिनकी कीमत 2.7 अरब डॉलर है। इस पर 38.9 प्रतिशत और 35.3 प्रतिशत का भारी अमेरिकी शुल्क लगेगा। यह वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया की दरों से काफी अधिक है। इसके अलावा तौलिए और चादर जैसे तैयार वस्त्र, जिनके निर्यात से भारत को 3 अरब अमेरिकी डॉलर की आय होती है, पर अब 34 प्रतिशत शुल्क लगेगा।
  • भारत के 2 अरब अमेरिकी डॉलर के झींगा निर्यात, जो वैश्विक आपूर्ति का 32 प्रतिशत है, पर अब 25 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगेगा।
  • 10 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के आभूषण निर्यात, जो भारत के वैश्विक आभूषण व्यापार का 40 प्रतिशत है पर अब 27.1 प्रतिशत शुल्क लग रहा है।
  • थिंक टैंक ने कहा कि भारत के 4.7 अरब डॉलर के धातु निर्यात मुख्य रूप से इस्पात, एल्युमीनियम और तांबा  को भी नुकसान होगा। 
  • भारत के इंजीनियरिंग निर्यात मशीनरी में 6.7 अरब डॉलर और ऑटो पार्ट्स में 2.6 अरब डॉलर पर अब 26 प्रतिशत से अधिक अमेरिकी टैरिफ लग रहे हैं।
  • 4.1 अरब डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम निर्यात अभी भी टैरिफ मुक्त हैं, लेकिन भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के उपयोग पर जुर्माना लगाया जा सकता है। 
  • इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत के 10 अरब डॉलर के हीरा और आभूषण निर्यात पर ट्रंप ने 27.1 प्रतिशत टैरिफ लगया है। यह इस क्षेत्र में उसके वैश्विक व्यापार का 40 प्रतिशत है, इस क्षेत्र के लिए एक भारी झटका है।

जीटीआरआई ने दिया सुझाव
जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को ब्याज समकारी योजना को पुनर्जीवित, साथ ही एक हेल्पडेस्क बनाने, व्यापार समझौते का रणनीतिक उपयोग करने और नए निर्याकतों को शामिल करने की जरूरत है। 

इसके अलावा पिछले साल बंद की गई ब्याज समानता योजना को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। थिंक टैंक ने सुझाव दिया है कि इस योजना को 15,000 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट और पांच साल की प्रतिबद्धता के साथ फिर से लागू किया जाए, ताकि निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को रियायती दर पर ऋण मिल सके। 

उच्च टैरिफ से बचाने के लिए निर्यातकों को ब्याज सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन दे सकती है सरकार
अमेरिकी टैरिफ के असर से कपड़ा और रसायन जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों को बचाने के लिए सरकार ब्याज सब्सिडी एवं अन्य राजकोषीय प्रोत्साहन दे सकती है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया, वाणिज्य मंत्रालय ने इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और कृषि सहित कई क्षेत्रों के निर्यातकों संग बैठकें की हैं ताकि टैरिफ से जुड़ी समस्याओं को समझा जा सके। इसके तहत, सरकार समर्थन उपायों पर काम कर रही है।

अधिकारी ने बताया, खाद्य, समुद्री और वस्त्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों ने 25 फीसदी टैरिफ से निपटने के लिए केंद्र से वित्तीय मदद एवं किफायती कर्ज देने का अनुरोध किया है। निर्यातकों ने ब्याज सब्सिडी, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क-टैक्स में छूट (आरओडीटीईपी) और राज्य-केंद्रीय करों व शुल्क रियायत जैसी योजनाओं के तहत बकाया राशि का समय पर भुगतान के साथ अमेरिका के लिए सीधे निर्यात जैसे राजकोषीय प्रोत्साहनों के विस्तार की भी अपील की है। मंत्रालय समर्थन के लिए राज्यों के साथ बातचीत भी करेगा।

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अमेरिका में सीमित पहुंच से विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा असर
मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को कहा, अमेरिकी बाजार तक सीमित पहुंच से भारत के विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि की संभावनाएं कम होंगी। हालांकि, देश की घरेलू मांग इन बाहरी दबावों के प्रति मजबूत बनी रहेगी। मूडीज रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रिश्चियन डी गुजमैन ने कहा, भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ की दर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य प्रमुख निर्यातकों से काफी अधिक है। इनमें से कई देशों की दरें 15-20 फीसदी के बीच हैं। अन्य देशों की तुलना में उच्च टैरिफ ने भारत को नुकसान पहुंचाया है। भारत, चीन से निवेश और व्यापार लाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है। 


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