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ISMA: 'देश में चीनी की कोई कमी नहीं', उत्पादन से जुड़ी संस्था का दावा; जानिए फिर कीमतों में क्यों आया उछाल

Mon, 24 Aug 2026 04:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उद्योग जगत की संस्था आईएसएमए का कहना है कि उसे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चीनी की खुदरा कीमतों में गिरावट आएगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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चीनी की कीमतों पर इस्मा। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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देश में चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। उद्योग जगत की प्रमुख संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए/इस्मा) ने साफ किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। आईएसएमए को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में खुदरा चीनी की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

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आईएसएमए के अध्यक्ष नीरज शिरगाओकर ने चीनी के दाम बढ़ने के पीछे के कारणों का विस्तार से खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कीमतों में वृद्धि मुख्य रूप से बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों के कारण हुई है। इसके साथ ही, व्यापारियों द्वारा चीनी का अधिक भंडारण भी एक बड़ा कारण रहा है। इससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बना। मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई। इससे चीनी का कुल उत्पादन अनुमान से कम रहा। इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार में अस्थायी दबाव पैदा किया। परिणामस्वरूप, चीनी की कीमतें ऊपर चढ़ गईं।

चीनी की कीमतें क्यों बढ़ीं?

आईएसएमए के अनुसार, चीनी की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। बाजार में जमाखोरी ने चीनी की मांग को कृत्रिम रूप से बढ़ाया है, जिससे दाम बढ़े। व्यापारियों द्वारा बड़ी मात्रा में चीनी का भंडारण करने से बाजार में आपूर्ति बाधित हुई। इसके अतिरिक्त, प्रतिकूल मौसम जैसे कि कम बारिश या अत्यधिक गर्मी ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया। इससे चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पाया और उत्पादन प्रभावित हुआ।

क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत?

उद्योग संस्था आईएसएमए ने उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई है। संस्था का मानना है कि बाजार में सट्टेबाजी और भंडारण की स्थिति में सुधार होगा। आने वाले दिनों में चीनी की खुदरा कीमतों में कमी आएगी, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। आईएसएमए ने कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। बाजार में आपूर्ति सामान्य होने से दाम स्थिर होंगे और फिर नीचे आएंगे।

बाजार को स्थिर रखने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए कई सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं:

  • आयात: बाजार में विश्वास बढ़ाने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्चे चीनी का आयात।
  • स्टॉक सीमा: डीलरों के लिए राष्ट्रव्यापी स्तर पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है, जिसे आईएसएमए ने 200 टन करने का सुझाव दिया है।
  • निगरानी: भौतिक स्टॉक सत्यापन, जीएसटी डेटा आधारित साप्ताहिक प्रकटीकरण और पेराई सीजन को पहले शुरू करना शामिल है।

क्या इथेनॉल कार्यक्रम चीनी की महंगाई के लिए जिम्मेदार है?

एसोसिएशन ने साफ किया है कि इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है। इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन पहले ही कुल उपलब्धता के आधार पर तय किया जाता है। अब इस कार्यक्रम में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़कर 75% हो गई है, जबकि चीनी का हिस्सा केवल 25% है। इथेनॉल राजस्व से मिलों ने 20 अगस्त 2026 तक किसानों के 97% बकाये का भुगतान कर दिया है।

वैश्विक बाजार और पूर्व के संकट से वर्तमान स्थिति कितनी अलग है?

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी की कीमतें 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं, जो दो महीने में 16% से अधिक की तेजी दर्शाती हैं। इस वैश्विक उछाल के कारण आयातित चीनी की लागत बढ़ गई है, जिससे घरेलू कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, मौजूदा स्थिति वर्ष 2016-17 के सूखे जैसी नहीं है, जब देश में केवल 203 LMT उत्पादन हुआ था। आज हमारे पास 279 LMT का मजबूत उत्पादन है।

आगे बाजार का रुख कैसा रहेगा?

सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के चलते पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में गिरावट शुरू हो चुकी है। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई शुरू होने से अक्तूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य चार लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें जल्द ही सामान्य हो जाएंगी।

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