देश में चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। उद्योग जगत की प्रमुख संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए/इस्मा) ने साफ किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। आईएसएमए को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में खुदरा चीनी की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
आईएसएमए के अनुसार, चीनी की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। बाजार में जमाखोरी ने चीनी की मांग को कृत्रिम रूप से बढ़ाया है, जिससे दाम बढ़े। व्यापारियों द्वारा बड़ी मात्रा में चीनी का भंडारण करने से बाजार में आपूर्ति बाधित हुई। इसके अतिरिक्त, प्रतिकूल मौसम जैसे कि कम बारिश या अत्यधिक गर्मी ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया। इससे चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पाया और उत्पादन प्रभावित हुआ।
उद्योग संस्था आईएसएमए ने उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई है। संस्था का मानना है कि बाजार में सट्टेबाजी और भंडारण की स्थिति में सुधार होगा। आने वाले दिनों में चीनी की खुदरा कीमतों में कमी आएगी, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। आईएसएमए ने कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। बाजार में आपूर्ति सामान्य होने से दाम स्थिर होंगे और फिर नीचे आएंगे।
सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए कई सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं:
एसोसिएशन ने साफ किया है कि इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है। इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन पहले ही कुल उपलब्धता के आधार पर तय किया जाता है। अब इस कार्यक्रम में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़कर 75% हो गई है, जबकि चीनी का हिस्सा केवल 25% है। इथेनॉल राजस्व से मिलों ने 20 अगस्त 2026 तक किसानों के 97% बकाये का भुगतान कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी की कीमतें 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं, जो दो महीने में 16% से अधिक की तेजी दर्शाती हैं। इस वैश्विक उछाल के कारण आयातित चीनी की लागत बढ़ गई है, जिससे घरेलू कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, मौजूदा स्थिति वर्ष 2016-17 के सूखे जैसी नहीं है, जब देश में केवल 203 LMT उत्पादन हुआ था। आज हमारे पास 279 LMT का मजबूत उत्पादन है।
सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के चलते पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में गिरावट शुरू हो चुकी है। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई शुरू होने से अक्तूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य चार लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें जल्द ही सामान्य हो जाएंगी।