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Report: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का चालू खाता घाटा 1% से कम रहने का अनुमान, केयरएज रेटिंग्स का दावा

Wed, 13 Aug 2025 01:53 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का चालू खाता घाटा मामूली रहने का अनुमान का है। भारत का अमेरिका को वस्तु निर्यात जीडीपी का केवल करीब 2% है, जिससे टैरिफ का असर सीमित रहेगा। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का चालू खाता घाटा एक प्रतिशत से कम रहने की उम्मीद है। केयरएज रेटिंग्स के रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में चालू खाता घाटा 0.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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 चालू खाता घाटा (सीएडी) एक आर्थिक संकेतक है। यह स्थिति तब होती है जब किसी देश के वस्तु और सेवाओं के आयात का मूल्य उसके निर्यात से अधिक होता है। 
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अमेरिकी टैरिफ का रहेगा सीमित असर
भारत की घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था अमेरिकी टैरिफ प्रभाव से कुछ हद तक सुरक्षित रहेगी। भारत का अमेरिका को वस्तु निर्यात जीडीपी का केवल करीब 2% है, जिससे टैरिफ का असर सीमित रहेगा।

अमेरिका और चीन के निर्यात में हुई वृद्धि
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में अमेरिका को निर्यात, जो कुल निर्यात का 19.8 प्रतिशत है, सालाना आधार पर 22% बढ़ा। चीन को निर्यात में भी 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज हुई। अमेरिका को निर्यात में यह मजबूती मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के कारण रही, जो टैरिफ से मुक्त हैं और अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में 30% हिस्सेदारी रखते हैं।

व्यापार वार्ता में भारत संवेदनशील क्षेत्रों के साथ नहीं करेगा समझौता
रिपोर्ट में इस वृद्धि का श्रेय आंशिक रूप से निर्यात में वृद्धि और फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए टैरिफ छूट जारी रहने को दिया गया है। हालांकि अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च टैरिफ दरों ने भारत पर अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने का दबाव बढ़ा दिया है। इसमें कहा गया कि भले ही बातचीत जारी है, लेकिन भारत कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के साथ समझौता नहीं करेगा। इसका मतलब है कि बातचीत पूरा होने में ज्यादा समय लग सकता है। 

चुनिंदा प्रमुख क्षेत्रों पर भी टैरिफ का खतरा
फिलहाल, दवाइयां और चुनिंदा इलेक्टॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्र छूट सूची में बने हुए हैं, लेकिन इन उत्पादों पर भी टैरिफ लागू होने की संभावना अभी भी बनी हुई है। रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्र, जो विवेकाधीन खर्च के अंतर्गत आते हैं, पारस्परिक टैरिफ से प्रभावित हो सकते हैं।

प्रतिस्पर्धी देशों पर कम टैरिफ से भारत को हो रहा नुकसान
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी बाजार में भारत के कुछ प्रतिस्पर्धी देश, जैसे वियतनाम और इंडोनेशिया, तुलनात्मक रूप से कम अमेरिकी टैरिफ से लाभान्वित हो सकते हैं। खासतौर से फुटवियर, कपड़ा और चमड़ा जैसी श्रेणियों में।
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एशिया और यूरोप के निर्यात में आ रही गिरावट
एशिया और यूरोप को भारत का निर्यात, जो देश के कुल निर्यात का 62 प्रतिशत है, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में साल-दर-साल गिरावट देखी गई। हालांकि, उच्च अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में बताया गया है कि इन कारकों से भारत को इस वर्ष अपने चालू खाता घाटे को प्रबंधनीय स्तर पर बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

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