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AI Impact Summit: वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत कहां? शीर्ष देशों पर ये बोले इंफोसिस के सह-संस्थापक

Wed, 18 Feb 2026 02:39 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंफोसिस के सह-संस्थापक ने कहा कि भारत के पास क्षमता है कि वह एआई के रेस में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। उनके अनुसार, भारत में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने की क्षमता है, विशेष रूप से एप्लिकेशन स्तर पर, जहां वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए एआई समाधानों का उपयोग किया जाता है। 
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क्रिस गोपालकृष्णन - फोटो : एक्स
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विस्तार
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भारत वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में शीर्ष तीन देशों में स्थान बना सकता है। इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन ने यह बात कही। उनके अनुसार भारत में मजबूत डेवलपर इकोसिस्टम और अनुप्रयोगों पर बढ़ते फोकस के चलते देश के पास यहां तक पहुंचने की क्षमता है।

क्या है एआई की असली ताकत?

उन्होंने कहा कि एआई की असली ताकत सिर्फ तकनीक होने में नहीं है, बल्कि इस बात में है कि उससे कौन-कौन से काम के एप्लिकेशन बनाए और इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत एक विशाल देश है जिसमें बड़ी संख्या में एप्लिकेशन और डेवलपर्स हैं। उनके अनुसार, भारत में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने की क्षमता है, विशेष रूप से एप्लिकेशन स्तर पर, जहां वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए एआई समाधानों का उपयोग किया जाता है। 

देश में बहुभाषी मॉडल के विकास के लिए चल रहे प्रयास

उन्होंने भारत में उन्नत एआई प्रणालियों, जिनमें बहु-मॉडल और बहुभाषी मॉडल शामिल हैं, के विकास के लिए चल रहे प्रयासों की ओर भी इशारा किया। ये मॉडल केवल अंग्रेजी आधारित मॉडलों से काफी अलग हैं और इन्हें विभिन्न भाषाओं और उपयोग के मामलों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारत की भाषाई विविधता और तकनीकी महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं। 

बिजली खपत वाली कंप्यूटिंग पर क्या बोले?

गोपालकृष्णन ने विशेष रूप से कम बिजली खपत वाली कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार में निवेश के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि कम बिजली खपत वाली कंप्यूटिंग में प्रगति अगली पीढ़ी के प्रोसेसर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो भविष्य में एआई विकास को गति प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में एआई पर चर्चा और शिखर सम्मेलन आयोजित करने से वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में देश की स्थिति मजबूत होगी। भारत में एआई पर वैश्विक चर्चाओं को लाने से भविष्य की प्रौद्योगिकियों की दिशा तय करने और नए अवसरों को खोलने में मदद मिलेगी। 

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