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रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का असर: भारत ने बढ़ाई पेट्रोल सप्लाई; दो महीने में भेजा 10 लाख बैरल ईंधन

Sun, 30 Aug 2026 11:13 AM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली

सार

यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस की रिफाइनरियों में ईंधन उत्पादन प्रभावित होने के बाद भारत पेट्रोल के बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। पिछले दो महीनों में भारतीय रिफाइनरों ने रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल भेजा। आखिर रूस को भारत की जरूरत क्यों बढ़ी?
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रूस को पेट्रोल-डीजल दे रहा भारत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस की कई रिफाइनरियों में ईंधन उत्पादन प्रभावित होने के बीच भारत रूस के लिए पेट्रोल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस के समुद्री रास्ते से पेट्रोल आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।

रूस को भारत से कितनी पेट्रोल सप्लाई हुई?

ऊर्जा विश्लेषण कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस ने समुद्र के रास्ते करीब 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन पेट्रोल आयात किया। पूरे महीने के हिसाब से यह मात्रा करीब 4.70 लाख टन बैठती है। व्यापार सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारतीय रिफाइनरों ने रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल की आपूर्ति की है। इसमें मुख्य भूमिका गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी की रही, जिसका संचालन नायरा एनर्जी करती है। कंपनी में रूस की रोसनेफ्ट की करीब आधी हिस्सेदारी है।

यूक्रेनी हमलों से रूस में क्यों बढ़ी पेट्रोल की जरूरत?

रूस दुनिया के बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल है, लेकिन यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने उसकी घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों के चलते रूस का घरेलू पेट्रोल उत्पादन कुछ समय में 70 फीसदी तक घटा है। इससे देश के भीतर पेट्रोल की कमी बढ़ी और मॉस्को को घरेलू मांग पूरी करने के लिए विदेशों से पेट्रोल मंगाना पड़ा। रूस ने ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए पेट्रोल बिक्री पर कुछ प्रतिबंध भी लागू किए हैं। वॉर्टेक्सा के मुताबिक, जुलाई और अगस्त के दौरान रूस की रिफाइनरियों पर 32 हमले हुए, यानी औसतन लगभग हर दूसरे दिन एक हमला।

भारत का रूस से कच्चे तेल का कारोबार भी बढ़ा

2022 के बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख स्रोतों में शामिल हो गया है, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने में होता है। आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई में भारत ने रूस से प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल खरीदा। यह फरवरी में दर्ज करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन की तुलना में काफी ज्यादा है और भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। ऐसी संभावना जताई गई है कि रूस को भेजा गया कुछ पेट्रोल रूसी कच्चे तेल से ही तैयार किया गया हो।

भारत के अलावा किन देशों ने रूस को पेट्रोल भेजा?

अगस्त में भारत के अलावा तुर्किये और मोरक्को ने भी रूस को पेट्रोल की आपूर्ति की। घरेलू उत्पादन और मांग के बीच बढ़ते अंतर के कारण रूस को विदेशी बाजार से पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है। रूस ने जुलाई में पेट्रोल के पूर्ण निर्यात प्रतिबंध को जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया था। वहीं, डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध को 1 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था।

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वॉर्टेक्सा के मुताबिक, अगस्त में रूस के कुल पेट्रोल आयात का करीब 55 फीसदी, यानी लगभग 2.60 लाख टन, प्रतिबंधों के दायरे वाले जहाजों से आया। रिपोर्ट में कहा गया कि अगस्त में भारत से रूस पहुंचने वाले पेट्रोल के सभी कार्गो प्रतिबंधित बेड़े के जरिए ले जाए गए और भूमध्यसागर में जहाज से जहाज तक माल स्थानांतरण किया गया। रूस के अगस्त पेट्रोल आयात का करीब 40 फीसदी हिस्सा इसी तरह के शिप-टू-शिप ट्रांसफर से आया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ट्रांसफर की थी, जिनमें जहाजों ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) सिग्नल बंद रखा।

डीजल की स्थिति अब भी अलग

रूस में पेट्रोल आयात बढ़ने के बावजूद डीजल का निर्यात काफी सीमित बना हुआ है। निर्यात प्रतिबंध, रिफाइनरियों को हुए नुकसान और ईंधन टर्मिनलों में व्यवधान इसका प्रमुख कारण हैं। वॉर्टेक्सा के अनुसार, 25 अगस्त तक अगस्त में रूस का समुद्री डीजल/गैसऑयल निर्यात करीब 1.50 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 6.10 लाख बैरल प्रतिदिन कम और पांच साल के मौसमी औसत से 81 फीसदी नीचे है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू उत्पादन पर दबाव बने रहने के कारण रूस को आने वाले समय में भी कुछ मात्रा में पेट्रोल का आयात जारी रखना पड़ सकता है।

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