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बर्लिन में भारत का दूसरा दांव: क्या अमेरिका के टैरिफ झटकों का जवाब यूरोप में, अब तक की कोशिशों से क्या मिला?

सार

भारत अमेरिका के टैरिफ झटकों का जवाब यूरोप में खोज रहा है। एक साल में तीन बार बदली अमेरिकी शर्तों के बीच नजरें बर्लिन में भारत के दूसरे दांव पर हैं। दरअसल, ट्रंप और रुबियो के सकारात्मक बयानों के बावजूद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर का कहना है कि घोषणा तुरंत होने वाली नहीं है। ऐसे में भारत रास्ता तलाश रहा है।
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ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर नजरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका ने बीते डेढ़ साल में भारतीय माल पर शुल्क (टैरिफ)  की दर तीन बार बदली। अब अधिकतर भारतीय सामान पर सामान्य शुल्क के ऊपर 10 फीसदी लगता है। फरवरी 2026 में 18% की दर वाले जिस अंतरिम ढांचे का एलान हुआ था, उस पर आठ महीने बाद भी हस्ताक्षर नहीं हुए। इसी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 से 24 अक्तूबर तक जर्मनी और 24 से 27 अक्तूबर तक नीदरलैंड के दौरे पर रहेंगे। उनके साथ करीब 100 कंपनियों और नवउद्यमों का दल है।

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बीते चार साल में भारत ने एक के बाद एक समझौते किए हैं और यूरोपीय संघ उसका 22वां मुक्त व्यापार साझेदार बना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के व्यापार समझौते पर सकारात्मक बयान के बावजूद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर का कहना है कि घोषणा तुरंत होने वाली नहीं है। यानी तस्वीर अब भी साफ नहीं।

यूरोप का दरवाजा खुला, पर ताला अब तक नहीं हटा
यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। यूरोपीय संघ अपने 99.3 प्रतिशत और भारत अपने 96.6 प्रतिशत कारोबार पर शुल्क हटाएगा या घटाएगा। भारत यूरोपीय कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत तक के स्तर से घटाकर 40 प्रतिशत पर लाएगा। पर नौ महीने बाद भी यह लागू नहीं हुआ है। गोयल का यह दौरा इसलिए नीतिगत कम और व्यावहारिक ज्यादा है।
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बर्लिन और हेग में क्या होगा
गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में हिस्सा लेंगे और जर्मनी के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री तथा चांसलर कार्यालय के जी-7 और जी-20 शेरपा से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। भारतीय कारोबारी दल की अलग बैठकें वाहन और उन्नत विनिर्माण, सूचना तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि एवं उपभोक्ता सामान, दवा और स्वास्थ्य में होंगी।

  • नीदरलैंड में बातचीत सरकार से सरकार के स्तर पर होगी। 25 अक्तूबर को भारतीय दल रॉटरडम बंदरगाह देखने जाएगा और 26 अक्तूबर को हेग में भारत-नीदरलैंड कारोबार मंच की बैठक होगी।

अब तक की कोशिशों से क्या मिला
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसमें वस्तुओं का निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवाओं का 421.3 अरब डॉलर रहा। यह उसी साल हुआ जिस साल अमेरिका ने शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था।

  • मुक्त व्यापार समझौते वाले बाजारों में आसियान देश सबसे ऊपर रहे, जहां 38.42 अरब डॉलर का माल गया। संयुक्त अरब अमीरात 37.36 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ और उसी वित्त वर्ष में वहां 13.44 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज हुआ।
  • ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में वहां भेजे माल के लिए सिर्फ 1,482 मूल प्रमाणपत्र जारी हुए थे, समझौते के बाद यह औसतन 45 हजार से ऊपर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया को निर्यात चार अरब डॉलर से बढ़कर 7.28 अरब डॉलर हो गया।
  • ओमान के साथ समझौता एक जून 2026 को लागू हुआ और जून में ही वहां निर्यात पिछले महीने से 54.7 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 189.6 प्रतिशत बढ़ गया। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ समझौता अक्तूबर 2025 से लागू है और अब तक 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं।
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