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रिपोर्ट में दावा: घरेलू कंपनियों पर भरोसे के मामले में भारत सबसे आगे, व्यापार में विश्वास के लिए महत्वपूर्ण हो गई है भू-राजनीति

Wed, 25 May 2022 06:49 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, दावोस।

सार

भारतीय कंपनियों के 50 फीसदी सीईओ का मानना है कि कोरोना महामारी संबंधी गतिरोध के बावजूद घरेलू कंपनियों ने काफी जुझारू क्षमता का प्रदर्शन किया है। ईवाई इंडिया के सर्वे के मुताबिक, भू-राजनीतिक चुनौतियों ने भी कारोबार के सामने कुछ नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।
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घरेलू कंपनियां (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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घरेलू कंपनियों पर भरोसे के मामले में भारत 89 फीसदी के साथ सबसे आगे है। भारतीय कंपनियां घरेलू आबादी में सबसे भरोसेमंद बनकर उभरी हैं। इस मामले में 82 फीसदी के साथ चीन दूसरे स्थान पर है। कनाडा तीसरे, अमेरिका चौथे और ब्रिटेन पांचवें पायदान पर है। विश्व आर्थिक मंच की बैठक में जारी एडेलमैन के ट्रस्ट बैरोमीटर की विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार में विश्वास के लिए भू-राजनीति महत्वपूर्ण हो गई है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु खतरों और सामाजिक असमानताओं की चुनौतियां हैं तो कंपनियों पर भी रूसी आक्रमण का जवाब देने के लिए दबाव है। अध्ययन में शामिल 47 फीसदी का कहना है कि उन्होंने रूस का यूक्रेन पर आक्रमण के प्रति मूल कंपनी की प्रतिक्रिया के आधार पर ब्रांड को खरीदा या बहिष्कार किया। इसके अलावा, कंपनियों के कर्मचारियों ने बताया कि वे मानते हैं कि अगर उनके नियोक्ता यूक्रेन के आक्रमण के जवाब में अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं तो वे उनके प्रति भी ज्यादा वफादार होंगे।

भारतीय कंपनियों का कोरोना में जुझारू प्रदर्शन
उधर, भारतीय कंपनियों के 50 फीसदी सीईओ का मानना है कि कोरोना महामारी संबंधी गतिरोध के बावजूद घरेलू कंपनियों ने काफी जुझारू क्षमता का प्रदर्शन किया है। ईवाई इंडिया के सर्वे के मुताबिक, भू-राजनीतिक चुनौतियों ने भी कारोबार के सामने कुछ नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।
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इन चुनौतियों के बावजूद कंपनियों ने उस समय जुझारूपन दिखाया, जब भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी से उबरकर सुधार की राह पर आगे बढ़ने के दौर में थी।

विलय एवं अधिग्रहण बना प्रमुख हथियार
ईवाई का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और आपूर्ति समेत अन्य दबाव के बीच भारतीय सीईओ के लिए विलय एवं अधिग्रहण एक प्रमुख रणनीतिक साधन बना हुआ है। वे नया कारोबार खड़ा करने के बजाय स्थापित कारोबार के अधिग्रहण पर जोर दे रहे हैं। अपने जोखिम आकलन को नए सिरे से तय कर रहे हैं और भविष्य के लिए अपनी निवेश रणनीति बना रहे हैं।

  • 80 फीसदी घरेलू सीईओ का कहना है कि वैश्विक परिचालन एवं आपूर्ति शृंखला के हिसाब से तालमेल बिठाना पड़ रहा है। वहीं, 63 फीसदी लॉजिस्टिक लागत घटाना और जुझारू क्षमता बढ़ाना चाहते हैं।  
  • ईवाई इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी ने कहा, भारतीय सीईओ मौजूदा चुनौतियों का आगे आकर मुकाबला कर रहे हैं।
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