फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chabahar Port: भारत और ईरान चाबहार पोर्ट पर समझौता फाइनल करने के करीब, जानिए कहां अटका है मामला?

Sat, 10 Sep 2022 05:51 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chabahar Port: चाबहार पोर्ट के मसले पर भारत और ईरान के बीच दीर्घकालिक समझौते की राह में कोई बड़ा मुद्दा बाधक नहीं है बल्कि मतभेद सिर्फ मध्यस्थता के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। जिसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा।
विज्ञापन
चाबहार पोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत और ईरान रणनीतिक चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) के संचालन के लिए एक दीर्घकालिक समझौते (Long Term Agreement) के करीब है। यह समझौता मध्यस्थता से जुड़े एक मसले पर अटका हुआ है जिसे जल्द ही सुलझा लिए जाने की उम्मीद है। इस मामले से जुड़े एक जानकार ने इस बात की जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह एक दीर्घकालिक समझौता होगा जो दस वर्षों के लिए वैध होगा उसके बाद इसका स्वतः नवीनीकरण हो जाएगा। यह समझौता उस प्राथमिक समझौते का स्थान लेगा जो चाबहार पोर्ट के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल पर भारत के संचालन के लिए किया गया था और जिसका वर्षिक आधार पर नवीनीकरण किया जा रहा था। 

यह खबर ऐसे समय पर आई है जब चीन ईरान के बंदरगाहों और तटीय संसाधनों पर निवेश में दिलचस्पी दिखा रहा है और ईरानी पक्ष नई दिल्ली पर शहीद बेहेश्ती टर्मिनल पर विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए कह रहा है। इस टर्मिनल का संचालन भारत सरकार के स्वामित्व वाली इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सर्बानंद सोनोवाल के पिछले महीने की ईरान यात्रा के दौरान समझौते के रूपरेखा पर हुई चर्चा

chabahar-port

इस दीर्घकालिक समझौते की रूपरेखा भारत के जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के पिछले महीने की ईरान यात्रा के दौरान बनाया गया। ईरान के शहरी विकास मंत्री रोस्तम घासेमी से बीतचीत के दौरान इस पर विशेष रूप से चर्चा की गई। 

इस मामले के जानकारों के अनुसार चाबहार पोर्ट के मसले पर भारत और ईरान के बीच दीर्घकालिक समझौते की राह में कोई बड़ा मुद्दा बाधक नहीं है बल्कि मतभेद सिर्फ मध्यस्थता के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि ईरान के संविधान के तहत इस तरह की मध्यस्थता को विदेशी अदालतों में नहीं भेजा जा सकता है। इससे समझौते के तहत एक प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी जो मुश्किल होगा।

हालांकि, दोनों पक्ष इस मामले के शीघ्र समाधान को लेकर आशान्वित हैं क्योंकि कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ इस पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही ईरानी पक्ष चाबहार बंदरगाह पर अपने विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए भारत पर जोर दे रहा है, जिसमें 700 किलोमीटर की चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन को पूरा करना भी शामिल है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें