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Income Tax Act 2025: छह दशक पुराने कानून की विदाई, लागू हुआ नया इनकम टैक्स एक्ट 2025, जानिए क्या-क्या बदल गया

Wed, 01 Apr 2026 09:23 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के बारे में सबकुछ जानें। सीबीडीटी के इस नए नियम से टैक्सपेयर्स को टीडीएस रिफंड और आईटीआर फाइलिंग में कैसे मिलेगी राहत। जानने के लिए पढ़ें। 
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नया आयकर कानून - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत के कर प्रशासन में बुधवार, 1 अप्रैल 2026 से एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। देश में छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह अब 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' ने ले ली है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस नए कानून के लागू होने को विकसित भारत की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य करदाताओं के लिए आयकर से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक आसान बनाना है।

क्या है नए कानून का मूल ढांचा?

सीबीडीटी साफ किया है कि नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' देश की मूल कर नीति में कोई बदलाव नहीं करता है। इसके बजाय, यह सरल भाषा, एक सुव्यवस्थित ढांचे और पढ़ने में आसान होने के कारण करदाताओं के लिए अनुपालन  को आसान बनाने की ओर एक बड़ा कदम है। पुराने कानून के भारी-भरकम दस्तावेजों की तुलना में नए कानून का आकार भी काफी कम कर दिया गया है।

टैक्सपेयर्स को मिलने वाले प्रमुख फायदे

इस नए आयकर अधिनियम के लागू होने से आम करदाताओं को कई सीधी राहतें मिलेंगी:

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'सिंगल टैक्स ईयर' की शुरुआत: नए कानून ने दशकों से चले आ रहे 'असेसमेंट ईयर' और 'प्रीवियस ईयर' के बीच के उलझाऊ अंतर को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब पूरे सिस्टम को एक ही "टैक्स ईयर" फ्रेमवर्क में बदल दिया गया है, जिससे कर समयसीमा को समझना बहुत आसान हो गया है।

देरी से आईटीआर पर भी मिलेगा टीडीए रिफंड: नए कानून का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब करदाता तय डेडलाइन के बाद अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने पर भी टीडीएस रिफंड का दावा कर सकेंगे। इसके लिए उन पर कोई दंडात्मक शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

ट्रांजिशन और ई-फाइलिंग की नई व्यवस्था

चूंकि यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, इसलिए आयकर विभाग ने करदाताओं की सुविधा के लिए एक सुचारू ट्रांजिशन प्रक्रिया तैयार की है। 

  • आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर बदलाव के इस समय के दौरान पुराने और नए, दोनों आयकर कानूनों के तहत सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। 
  • पिछले वर्षों से जुड़ी सभी असेसमेंट प्रक्रियाएं, अपील और अन्य संबंधित कार्यवाहियां तब तक पुराने अधिनियम के तहत ही चलती रहेंगी, जब तक कि उनका अंतिम रूप से समाधान नहीं हो जाता।
  • जुलाई 2026 में असेसमेंट ईयर 2026-27 (जो पुराने कानून द्वारा शासित अवधि से संबंधित है) के लिए रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता पुराने कानून के तहत निर्धारित फॉर्म का ही उपयोग करेंगे।
  • वहीं दूसरी ओर, जून 2026 से शुरू होने वाले टैक्स ईयर 2026-27 के लिए सभी एडवांस टैक्स भुगतान नए कानून के प्रावधानों के अनुसार ही किए जाएंगे।

'इनकम टैक्स एक्ट 2025' का लागू होना भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। पुरानी जटिलताओं को दूर कर और भाषा को सरल बनाकर, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आम आदमी और व्यापारिक जगत बिना किसी अनावश्यक दबाव के स्वेच्छा से कर नियमों का पालन कर सकें।

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