ऑक्सफैम इंटरनेशनल के एक विश्लेषण में पाया गया कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक से ऋण या अनुदान प्राप्त करने वाले 60% देश अधिक या बढ़ती आय असमानता का सामना कर रहे हैं। ऑक्सफैम जो एक गैर-लाभकारी समूह है ने बताया है कि 106 ऐसे देशों में से 64 में या तो उच्च स्तर की आय असमानता देखी जा रही है या असमानता में वृद्धि होती दिख रही है।
विभिन्न देशों की आर्थिक असमानता का निर्धारण करने के लिए गिनी गुणांक नामक एक तरीके का उपयोग किया जाता है, जहां 0.4 से ऊपर के मान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा चेतावनी के संकेत के रूप में देखा जाता है। ऑक्सफैम के अध्ययन के अनुसार, घाना, होंडुरास और मोजाम्बिक सहित 42 देशों में उच्च आय असमानता है। इसके अतिरिक्त, पिछले एक दशक में, बुर्किना फासो, बुरुंडी, इथियोपिया और जाम्बिया जैसे 37 देशों में भी आय के मामले में असमानता बढ़ी है।
ऑक्सफैम इंटरनेशनल के वाशिंगटन डीसी कार्यालय का नेतृत्व करने वाली केट डोनाल्ड ने आईएमएफ और विश्व बैंक की आलोचना करते हुए कहा कि वे असमानता को कम करने को प्राथमिकता देने का दावा करते हैं लेकिन उन नीतियों का समर्थन करते हैं जो अमीर और बाकी लोगों के बीच बीच की खाई को और बढ़ाते हैं।
डोनाल्ड ने कहा, "आईएमएफ और विश्व बैंक का कहना है कि असमानता से निपटना प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही उन वे उन नीतियों का समर्थन करते हैं जो अमीर और बाकी लोगों के बीच के विभाजन को बढ़ाती हैं।" स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा जैसी आवश्यक चीजों के लिए सार्वजनिक धन में कटौती के कारण आम लोगों को जिन संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है डोनाल्ड ने उनपर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, "आम लोग स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और परिवहन के सार्वजनिक वित्त पोषण में कटौती के कारण हर दिन अधिक से अधिक संघर्ष करते हैं। इस बड़े पाखंड को खत्म करना जरूरी है।" 1944 में अपनी स्थापना के बाद पहली बार असमानता को कम करने को प्राथमिकता देने के लिए विश्व बैंक के समझौते को 'ऐतिहासिक कदम' बताते हुए डोनाल्ड ने कहा, "अगर बैंक असमानता से निपटने के बारे में गंभीर है, तो पहली परीक्षा इसे दुनिया के सबसे गरीब देशों को ऋण देने को प्रमुख प्राथमिकता बनाना होगा, इस पर अब बसंत ऋतु की बैठक में चर्चा की जा रही है।"
15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलने वाली बसंत ऋतु की बैठक वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आईएमएफ और विश्व बैंक के अधिकारियों को एक साथ ला रही है। ऑक्सफैम ने विश्व बैंक के अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) में डोनर्स के योगदान में कमी पर भी प्रकाश डाला। यह योगदान दुनिया के सबसे गरीब देशों, विशेष रूप से अफ्रीका में सहायता करता है। ऑक्सफैम के अनुसार इस योगदान में कमी ऐसे समय में आई है जब ये देश ऋण संकट से जूझ रहे हैं। ऑक्सफैम ने सुपर-रिच पर करों में वृद्धि करके धन जुटाने का प्रस्ताव रखा है इससे विकास का समर्थन करने और जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए खरबों डॉलर का इंतजाम किया जा सकता है।