प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत किसानों के दावे का निपटारा दो माह के भीतर होगा। इस अवधि के एक माह बाद बीमा कंपनियों और राज्यों को मुआवजे के साथ जुर्माने के तौर पर 12 फीसदी ब्याज देना होगा। यह नियम सरकार इसी हफ्ते नए दिशा-निर्देशों के तहत लागू करने की तैयारी में है। फिलहाल कंपनियां दावे का भुगतान करने में 5 से 6 माह का वक्त लगाती हैं।
पीएमएफबीवाई एक उपज आधारित कार्यक्रम है। इसमें किसानों से खरीफ फसलों के लिए दो प्रतिशत, सभी रबी फसलों के लिए डेढ़ प्रतिशत, वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। कृषि मंत्रालय के बजट का लगभग 30 प्रतिशत या एक तिहाई, प्रत्येक वर्ष पीएमएफबीवाई के लिए प्रीमियम पर खर्च किया जाता है।
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक किसानों को निर्धारित 60 दिनों में बीमा दावे का भुगतान मुहैया कराने के लिए इसी हफ्ते दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसमें सबसे अहम बदलाव के तहत समय पर दावे का निपटारा नहीं करने वालों को मुआवजे के साथ जुर्माना भी भुगतना होगा।
विभिन्न परिस्थितियों के मद्देनजर दो माह के बाद चार सप्ताह अतिरिक्त बीमाकर्ता को दिए गए हैं। इस अवधि के बाद उन्हें 12 फीसदी ब्याज देना होगा।
नए पोर्टल से होगी दावों की निगरानी
कृषि मंत्रालय के मुताबिक सरकार नए पोर्टल pmfby.gov.in के जरिए सभी दावों की निगरानी करेगी। कंपनियों के लिए पोर्टल में दावे रजिस्टर करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था कंपनियों और राज्यों के लचर रवैये के मद्देनजर लायी जा रही है, क्योंकि इसके चलते किसानों को पीएम फसल बीमा का फायदा नहीं मिल पा रहा है।
अधिकतर मामलों में देखा गया कि कंपनियां छह माह तक दावे का निपटारा करने में लगा देती हैं। वर्ष 2017-18 में 17 कंपनियों ने 24 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम एकत्र किया और किसानों को 11,899 करोड़ रुपये का ही मुआजा मिला, जबकि दावा 16,448 करोड़ रुपये के किए गए थे। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.3 करोड़ किसानों ने 3.3 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि का बीमा इस योजना के तहत कराया।
राज्यों पर लग सकता है शुल्क
राज्यों पर जुर्माना प्रीमियम राशि शुल्क के रूप में लगाया जा सकता है या फिर केंद्र और राज्यों के बीच मौजूदा 50-50 अनुपात की तुलना में प्रीमियम की दर का उच्च हिस्सा वहन करने के लिए कहा जा सकता है। जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों और राज्यों को प्रोत्साहन देने का नियम भी दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के लिए बनी दलवई समिति ने फसल बीमा योजना में दावों के भुगतान में देरी की पहचान की है। सरकार योजना में राज्यों को अधिक स्वतंत्रता देने और पीएमएफबीवाई के कुछ हिस्सों में प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की योजना बना रही है। जिन राज्यों ने सौ फीसदी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें पांच प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रस्ताव दिया गया है।