रिजर्व बैंक ने एक सर्वे में बताया है कि जीडीपी वृद्धि दर में नरमी और बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़ने से देश के उपभोक्ताओं का रुख निराशावादी हो गया है। मई में 13 से अधिक शहरों में कराए गए उपभोक्ता भरोसा सर्वे में ज्यादातर लोगों ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता जताई। हालांकि, आधे से अधिक लोगों ने जल्द सुधार की भी उम्मीद लगाई है।
पिछले पांच वर्षों में रोजगार के मोर्चे पर मोदी सरकार को लेकर लोगों का रुख निराशावादी हुआ है। जून 2014 में जहां 65.1 फीसदी लोगों का कहना था कि रोजगार की स्थितियां अगले एक साल में सुधरेंगी। वहीं, मई 2019 में यह आंकड़ा कम होकर 59.3 फीसदी पहुंच गया है।
सर्वे में शामिल 58.9 फीसदी उपभोक्ताओं का मानना है कि उनकी आय में एक अगले साल में इजाफा होने की संभावना है, जबकि 29 फीसदी ने कहा कि उनकी आय पिछले एक साल में बढ़ी है। आधे से ज्यादा लोगों का कहना था कि अगले एक साल में रोजगार को लेकर ज्यादा बदलाव नहीं दिखेगा। वहीं, 20 फीसदी लोगों को लगता है कि उनकी आय पांच साल पहले के मुकाबले कम हो गई है।
सर्वे के अनुसार, देश में उपभोक्ता खर्च की वृद्धि दर छह साल के निचले स्तर पर चली गई है। मई में 68.6 फीसदी लोगों ने ही कहा कि उनका खर्च एक साल के मुकाबले बढ़ा है। यह सितंबर 2013 के बाद सबसे निचला स्तर है।
देश को आर्थिक मोर्चे पर बेहतर बताते हुए 61.4 फीसदी लोगों ने कहा कि अगले एक साल में अर्थव्यवस्था की स्थिति और मजबूत होगी, जबकि 20.9 फीसदी ने कहा कि हालात और खराब हो जाएंगे। सर्वे में शामिल 38.8 फीसदी लोगों का मानना था कि एक साल के मुकाबले जीडीपी की वर्तमान स्थिति बेहतर हुई है, जबकि 37.7 फीसदी ने इसमें गिरावट बताई है।