1998 से लेकर के 2010 के बीच भारतीयों ने करीब 34 लाख करोड़ रुपये अघोषित तौर पर विदेश में जमा किया था। संसद में पेश की गई वित्तीय मामलों की समिति की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
देश के तीन प्रतिष्ठित आर्थिक और वित्तीय शोध संस्थानों, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी), राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक शोध परिषद (एनसीएईआर) और राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंध संस्थान (एनआईएफएम) के अध्ययनों के आधार पर रखी गयी है।
एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने 16वीं लोकसभा भंग होने से ठीक पहले 28 मार्च को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में जमा की थी। संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘ऐसा लगता है कि अघोषित आय और संपत्ति का विश्वसनीय अनुमान लगाना खासा मुश्किल काम है। कालेधन पर राजनीतिक विवाद के बीच मार्च 2011 में तत्कालीन सरकार ने इस तीनों संस्थाओं को देश और देश के बार भारतीयों के कालेधन का अध्ययन/सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक,एनसीएईआर ने अपने अध्ययन में कहा है कि भारत से 1980 से लेकर 2010 के बीच 26,88,000 लाख करोड़ रुपये से लेकर 34,30,000 करोड़ रुपये का काला धन विदेश भेजा गया। वहीं, एनआईएफएम के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सुधार (1990-2008) के दौरान लगभग 15,15,300 करोड़ रुपये (216.48 अरब डॉलर) का काला धन भारत से विदेश भेजा गया। एनआईपीएफपी के अनुसार, 1997-2009 के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.2 फीसदी से लेकर 7.4 फीसदी तक काला धन विदेश भेजा गया।
समिति ने कहा है वह इस विषय में संबद्ध पक्षों से पूछताछ की प्रक्रिया में कुछ सीमित संख्या में ही लोगों से बात चीत कर सकी क्यों कि उसके पास समय का अभाव था। उसने कहा है कि इस लिए इस संदर्भ में गैर सरकारी गवाहों और विशेषज्ञों से पूछ ताछ करने की कवायद पूरी होने तक समिति की ‘ इस रपट को प्रथमिक रपट के रूप में लिया जा सकता है।’