अंतरिम बजट से एक दिन पहले सरकार ने मोबाइल फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कलपुर्जों पर आयात शुल्क को 15 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। सरकार के इस कदम से मोबाइल फोन का घरेलू विनिर्माण बढ़ने के साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, घरेलू बाजार में मोबाइल फोन सस्ते हो सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने सेल्युलर मोबाइल फोन के विनिर्माण से जुड़े कलपुर्जों के आयात पर शुल्क में कटौती संबंधी अधिसूचना 30 जनवरी को जारी की। इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के चेयरमैन पंकज महेंद्रू ने कहा, यह भारत में मोबाइल विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप है।
महेंद्रू ने कहा, 2024 में इलेक्ट्रॉनिक भारत का 5वां सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया है। यह कुछ साल पहले 9वें स्थान पर था। पीएलआई योजना की बदौलत इलेक्ट्रॉनिक निर्यात में मोबाइल का योगदान 52 फीसदी से अधिक है। यह आठ वर्षों में आयात से निर्यात आधारित विकास में योगदान देने वाला पहला उद्योग है। भारत ने 2023 में 13.9 अरब डॉलर का स्मार्टफोन निर्यात किया। देश में बिकने वाले 98 फीसदी से अधिक स्मार्टफोन घरेलू स्तर पर बनते हैं। एजेंसी
इन पर घटा शुल्क
फैसले का निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार पर नहीं होगा असर
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, शुल्क में कटौती का भारत में बने मोबाइल फोन की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इसकी वजह है
विनिर्माण तंत्र होगा मजबूत: वैष्णव
दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ने कहा, शुल्क को तर्कसंगत बनाने से मोबाइल फोन उद्योग में स्पष्टता आएगी। इस फैसले से घरेलू मोबाइल फोन विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद।