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Biz Updates: कपास आयात शुल्क में कटौती, वस्त्र उद्योग को मिलेगी राहत; पढ़ें अहम अपडेट्स

Sat, 30 May 2026 08:25 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिजनेस अपडेट्स - फोटो : amarujala.com
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केंद्र सरकार ने कपास आयात पर लगने वाले सभी सीमा शुल्कों को पांच महीने के लिए माफ कर दिया है। यह छूट 30 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य वस्त्र उद्योग को पर्याप्त कपास उपलब्ध कराना है। वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि इससे इनपुट लागत कम होगी और भारतीय वस्त्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

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उद्योग संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे परिधान क्षेत्र के लिए "बहुत जरूरी राहत" बताया। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने कहा कि इस उपाय से भारतीय वस्त्र और परिधान क्षेत्र के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ेगी। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, आयात शुल्क छूट 1 जून, 2026 से लागू होगी। वस्त्र मंत्रालय ने बताया कि यह उपाय कपास के ऑफ-सीजन के दौरान लागू किया गया है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन मिलेगा, इनपुट लागत नियंत्रित होगी। साथ ही, किसानों के हितों की रक्षा होगी और बाजार में स्थिरता सुनिश्चित होगी। 

एईपीसी अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को लाभ पहुंचाएगा। ये उद्यम कपास और सूत की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे थे। उन्होंने सभी कताई मिलों से अपील की कि वे सूत की कीमतों को तर्कसंगत बनाकर कम कपास लागत का लाभ दें। इससे पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला स्थिर होगी और परिधान निर्यातक अधिक प्रतिस्पर्धी रूप से निर्यात ऑर्डर प्राप्त कर पाएंगे।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार

भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) अध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क एक बड़ी बाधा था। उन्होंने बताया कि प्रमुख एशियाई प्रतिस्पर्धियों को पहले से ही कपास तक शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त है। कपास आयात शुल्क पूरी मूल्य शृंखला में लागत बढ़ा रहा था। यह भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात को बढ़ाने के प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा था।

निर्यात लक्ष्य और मुक्त व्यापार समझौते

भारत का वस्त्र निर्यात मुख्य रूप से कपास पर निर्भर करता है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्त्र और परिधान निर्यात करना है। चंद्रन ने कहा कि इस अस्थायी राहत से भारतीय निर्यातक मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से उभरते अवसरों का बेहतर लाभ उठा पाएंगे। यह कदम देश के निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।

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बायोफ्यूल उत्पादन बढ़ाना जरूरी, तभी घटेगा आयात और बढ़ेगी आत्मनिर्भरता: गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए जैव ईंधन (बायोफ्यूल) का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। महाराष्ट्र के लोनावला में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में बिटुमेन और विमानन ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की भारी कमी है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ रहा है। गडकरी ने बताया कि भारत को हर साल करीब 120 लाख टन बिटुमेन की आवश्यकता होती है, जबकि घरेलू तेल कंपनियां केवल 50 लाख टन बिटुमेन का उत्पादन कर पाती हैं। इसके चलते देश को 60 से 70 लाख टन बिटुमेन आयात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बिटुमेन की कीमत भी 45 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र में भी ईंधन की कमी देखने को मिल रही है। गडकरी के अनुसार, ईंधन की कमी के कारण नागपुर से संचालित होने वाली पांच उड़ानों को जल्द ही बंद करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि देश में जैव-आधारित विमानन ईंधन विकसित करने के प्रयास सफल रहे हैं और इससे किसानों को नई आय के अवसर मिल रहे हैं। गडकरी ने कहा कि किसान अब केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जा, बायोफ्यूल, बिटुमेन और हाइड्रोजन के उत्पादक भी बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि बायोफ्यूल, हरित ऊर्जा और हाइड्रोजन का बढ़ता उपयोग भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और देश को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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पश्चिम बंगाल में जुलाई तक आएगा नया बिजली टैरिफ- मनोहर लाल
पश्चिम बंगाल में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द नया टैरिफ मिल सकता है। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने कोलकाता में समीक्षा बैठक के बाद बताया कि राज्य के लिए नया बिजली टैरिफ आदेश जुलाई के अंत तक जारी होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार समय पर टैरिफ प्रस्ताव जमा नहीं कर सकी थी, लेकिन अब अगले एक महीने में प्रस्ताव बिजली नियामक आयोग को भेज दिया जाएगा। इसके बाद आयोग एक महीने के भीतर नया टैरिफ आदेश जारी कर सकता है।

मनोहर लाल ने बताया कि टैरिफ गणना में कुछ विसंगतियों को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को हुए करीब 15,000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई में सरकारी सहायता महत्वपूर्ण रही है। साथ ही राज्य सरकार अगले दो महीनों में वर्ष 2029 तक की बिजली जरूरतों का आकलन करेगी और सौर, तापीय, जलविद्युत तथा बैटरी भंडारण क्षमता की योजना तैयार करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि जुलाई से पूरे पश्चिम बंगाल में चरणबद्ध तरीके से करीब दो करोड़ स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाएंगे। पहले चरण में सरकारी कार्यालयों, कर्मचारियों और सरकारी आवासों में मीटर लगाए जाएंगे। बाद में 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। हालांकि उपभोक्ताओं को सुरक्षा जमा राशि देकर पोस्टपेड मीटर रखने का विकल्प भी मिलेगा। साथ ही राज्य को स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल करने और पहाड़ी पर्यटन शहरों में सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने की भी घोषणा की गई।

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