अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंधन निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि भारत की प्राथमिकता सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा करने, अच्छी तरह से लक्षित सहायता देने और छोटे तथा मझोले उद्योगों की रक्षा करने की होनी चाहिए, ताकि वे एक देश के रूप में उनकी कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में हार न हो। जॉर्जीवा ने आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक आम बैठक के दौरान बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोगों को बचाने और उनके स्वास्थ्य की देखभाल भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'क्या करने की आवश्यकता है? स्पष्ट है, सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा, अच्छी तरह से लक्षित सहायता, छोटे और मझोले उद्योगों की रक्षा, ताकि उनकी हार न हो।' उन्होंने आगे कहा कि जब तक हमारे पास स्वास्थ्य संकट से निपटने का एक टिकाऊ रास्ता नहीं है, हमें कठिनाइयों, अनिश्चितता और असमान सुधार का सामना करना पड़ेगा।
मानवीय संकट है कोविड-19
कोविड-19 को एक मानवीय संकट बताते हुए उन्होंने कहा कि खासतौर से जिन देशों में मौत अधिक हुई हैं, वहां ये संकट अधिक गहरा है। उन्होंने आगे कहा कि इस महामारी से भारत में एक लाख लोगों से अधिक की मौत हुई है। जार्जीवा ने कहा, 'इसलिए लोगों को बचाने और उनकी सेहत पर ध्यान देने की प्राथमिकता होनी चाहिए।'
भारत की जीडीपी में 10 फीसदी का संकुचन संभव
उन्होंने कहा, 'भारत ने अपनी क्षमता के अनुरूप उपाय किए हैं, दो फीसदी राजकोषीय उपाय और गारंटी के रूप में चार फीसदी राहत, लेकिन प्रत्यक्ष राजकोषीय उपाय नहीं किए गए।' उन्होंने कहा, 'इससे मदद मिलती है, लेकिन जब आप विकसित अर्थव्यवस्थाओं की क्षमताओं को देखते हैं, या कुछ अन्य उभरते बाजारों के उपायों को देखते हैं, तो यह कुछ हद तक कम है। हम इस साल भारत में बेहद आश्चर्यजनक रूप से जीडीपी में 10 फीसदी का संकुचन देख रहे हैं।' जॉर्जीवा ने कहा कि भारत की एक जीवंत अर्थव्यवस्था थी।