अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने एक बार फिर भरोसा जताया है कि अगले वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर सात फीसदी पहुंच जाएगी। आरबीआई की नरम मौद्रिक नीति और कंपनी कर में कटौती का लाभ जल्द ही मिलना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़ लेगी।
ब्रिटिश फर्म इकोनॉमिक इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) ने कहा है कि अमेरिका और चीन में जारी व्यापारिक तनाव का फायदा भारत को नहीं मिलेगा। भारत के बड़े पैमाने पर उत्पादन, सख्त श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में मौजूदा नीतिगत बाधाओं के कारण वैश्विक निवेशकों को पूरी तरह आकर्षित करने में मुश्किल आएगी।
अभी तक अनुमान जताया जा रहा था कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के कारण चीन छोड़ने वाली कंपनियों को भारत आकर्षित करेगा और वे अपना उत्पादन केंद्र यहां स्थापित करेंगी। ईआईयू के विश्लेषक सार्थक गुप्ता ने कहा कि नीतिगत बाधाओं के अलावा मुक्त व्यापार संधि का सीमित दायरा भी भारत की राह का रोड़ा बन सकते हैं। हालांकि, कंपनी कर कटौती का कुछ हद तक लाभ जरूर मिलेगा।