अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुधार की सलाह दी है। इस संदर्भ में आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने सरकार को सुझाव दिए हैं। गोपीनाथ ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बैंक और श्रम जैसे बुनियादी सुधारों पर जोर देना होगा।
आगे उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत की अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां हैं। इसके लिए भारत सरकार को घरेलू मांग, उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।
उन्होंने कहा कि बीती छह तिमाहियों से भारत की विकास दर सुस्त है और जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 फीसदी रह गई। बता दें कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का यह आंकड़ा लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है। गोपीनाथ ने सरकार को कहा कि, सरकार को अपने दूसरे कार्यकाल में ढांचागत सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।
अन्होंने कहा कि, अगर भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, तो उसके लिए निवेश को बढ़ाना होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना होगा। इतना ही नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च को भी बढ़ाने की आवश्यकता है।
सरकार को राजकोषीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास की नीतियां बनाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने जीएसटी के उचित अनुपालन, टैक्स सुधार और व्यापार के अनुकूल नीतियां बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि सबसे पहले भारत सरकार को बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों को सुधारना होगा। बैंकों का एनपीए कम करना भी आवश्यक है। वहीं एनबीएफसी सेक्टर पर भी नजर बनाए रखनी होगी। आगे उन्होंने भारत में श्रम, भूमि और उत्पाद बाजार में सुधार लाने की बात कही।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात करें, तो इस मुद्दे पर गोपीनाथ ने कहा कि अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड डील और ब्रेग्जिट जैसे मुद्दों के हल होने से वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। बता दें कि 2020 के लिए आईएमएफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 फीसदी आंकी है। वहीं 2019 के लिए तीन फीसदी आंकी है।