राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) और भारतीय आंतरिक लेखा परीक्षक संस्थान (आईआईए इंडिया) के साथ समझौता हुआ। इससे सहकारी बैंकों के भीतर शासन ढांचे में सुधार लाने के एनयूसीएफडीसी के कार्यों में सहयोग मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के दिशार्निदेश अनुसार देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को आंतारिक लेखापरीक्षा (इंटरनल ऑडिटर्स) के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने के लिए कहा गया है। इसमें आईआईए और बीसीबीएस द्वारा जारी मानक अपनाने को कहा गया है।
एनयूसीएफडीसी और आईआईए इंडिया का समझौता
इसी दिशार्निदेश के तहत राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी), जो कि भारत के शहरी सहकारी बैंकिंग (यूसीबी ) का अम्ब्रेला संगठन है और भारतीय आंतरिक लेखा परीक्षक संस्थान (आईआईए इंडिया) के साथ समझौता किया है। इससे देश के शहरी सहकारी बैंकों में जमाकर्ता का विश्वास बढ़ेगा।
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इस समझौते के तहत आईआईए इंडिया शहरी सहकारी बैंकों के भीतर शासन ढांचे में सुधार लाने के एनयूसीएफडीसी के कार्यों में सहयोग करेगा। सहयोग के दायरे में अंतरराष्ट्रीय लेखापरीक्षा मानकों को अपनाना, आंतरिक नियंत्रण प्रणालियों को मजबूत बनाना और आंतरिक लेखा परक्षिकों और वरिष्ठ प्रबंधन कर्मचारियों की व्यवसायिक क्षमताओं का बढ़ाना शामिल है।
समझौते का उद्देश्य
एनयूसीएफडीसी के सीईओ प्रभात चतुर्वेदी ने कहा इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य यूसीबी में वैश्विक स्तर पर मानकीकृत लेखा परीक्षा और जोखिम प्रबंधन ढांचे को लागू करना है। यह संस्थागत लचीलेपन को मजबूत करने और जमाकर्ता का विश्वास बहाल करने में नियामक उद्देश्यों के अनुरूप होगा।
क्यों है जरूरत ?
पिछले कुछ महीनों में देश के सहकारी बैंकों में काफी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई। इसमें मुंबई का न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक सबसे बड़ा उदाहरण है। न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। इसमें जमाकर्ताओं के पैसों का बैंक के उच्च अधिकारियों द्वारा दुरुपयोग किया गया है। फिलहाल इसकी जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाख की टीम कर रही है और बैंक के जमाकर्ता उनके अपने पैसों के लिए बैंक और कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।
आईआईए और बीसीबीएस क्या है ?
एआईआईए यह एक आंतरिक लेखा परीक्षकों की संस्थान है जो आंतरिक और जोखिम प्रबंध के लिए मानकों का विकास करता है। वहीं बीसीबीए (बेसल समिति ) जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए मानकों का विकास करता है। इन दोनों संस्थानों द्वारा जारी मानक वित्तीय क्षेत्र और आंतरिक नियंत्रण के लिए तैयार किए जाते हैं।