मनोरंजक कतार
कुछ जगहों पर लोग खुशी-खुशी कतार में लगना पसंद करते हैं। हाल ही में लंदन में हजारों लोग ट्रेनर्स जूते खरीदने के लिए रात भर कतार में लगे रहे। एक जोड़ी जूते की कीमत थी 180 पाउंड और इसे डिजाइन किया था केनी वेस्ट (अमरीकी गायक-संगीतकार) ने। स्ट्रीटवियर ब्रांड इस तरह नये उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले उसमें दिलचस्पी पैदा करते हैं और लोग उसे हाथों-हाथ खरीदने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं।
विंबलडन लॉन टेनिस टूर्नामेंट के इंतजार में घंटों बिता देना न सिर्फ मनोरंजक होता है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव का स्रोत भी है। प्राथमिकता कतार के बारे में सोच रहे किसी भी व्यवसाय को यह सोचना होगा कि किसी ब्रांड विशेष के लिए यह कितना सही होगा- क्या लोग उस तक तुरंत पहुंच चाहते हैं? या यह खरीदारी के पूरे अनुभव को कमतर और जटिल बना देगा?
बाजार विश्लेषक मिंटेल के एसोसिएट डायरेक्टर निक कैरोल का कहना है कि किराने की दुकानों पर लगी कतारें ग्राहकों में खीझ पैदा करती हैं।
किराना दुकान की कतार
सुपरमार्केट में खरीदारी करने वाले 24 फीसदी लोग वहां इंतजार करने में लगने वाले समय से नाखुश हैं। ऐसी जगहों पर कतार से बचने के लिए कई तरकीबें अपनाई जा रही हैं। कैरोल कहते हैं, "सेंसबरी (ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी सुपरमार्केट चेन) ने स्मार्टफोन के जरिये सेल्फ-बास्केट स्कैनिंग को आगे बढ़ाया है। इसमें लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।"
16 से 34 साल के आधे लोग सोचते हैं कि किराने की दुकानों पर ऐसी टेक्नोलॉजी होनी चाहिए। जिस तरह 10 या कम आइटम खरीदने वाले ग्राहकों के लिए अलग कतार बनाई जाती है, उसी तरह यह भी ग्राहकों के प्रवाह को सुधारने का एक तरीका है।
लेकिन असल मसला तब खड़ा होता है जब लोग किसी व्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ने के लिए पैसे का भुगतान कर सकते हैं। कई लोगों को इसी से चिढ़ है। क्या यह अवधारणा समाज को दो स्तरों में बांटती है? ऐसा लगता है कि इसका जवाब "हां" है- लेकिन जैसा कि बगीनी कहते हैं कि समाज हमेशा से दो-स्तरीय रहा है।
क्या नकद पैसे का वर्ग की जगह ले लेना समस्या है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप पूछ किससे रहे हैं। एमआईटी के डिक लार्सन कहते हैं, "ये सिर्फ बाजार की ताकतें हैं जो धीरे-धीरे कई चीजों पर नियंत्रण कर रही हैं।"
डिक लार्सन कतार में इंतजार के विशेषज्ञ हैं और डॉक्टर क्यू के उपनाम से मशहूर हैं।
कतार में खड़े होने का अनुभव
किसी कतार में खड़े लोगों के अनुभव जरूरी नहीं कि इसमें लगे समय के बारे में ही हो। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इंतजार के दौरान क्या हुआ। युद्ध बाद के अमरीका में न्यूयॉर्क की कई गगनचुंबी इमारतों में लिफ्ट के पास आईने लगा दिए गए थे। लोगों को शिकायत रहती थी कि लिफ्ट के लिए उन्हें बहुत इंतजार करना पड़ता है।
आईने लग जाने के बाद दफ्तरों के कर्मचारी और होटलों के मेहमान खुद को निहार सकते थे। इससे लिफ्ट के इंतजार का समय तो नहीं बदला, लेकिन लंबे इंतजार की शिकायतें घट गईं। कतार में खड़े होकर इंतजार करना तभी अनुचित लग सकता है यदि उस समय का अनुभव परेशानी भरा हो। इसे देखने का एक और तरीका भी है। सोचिए कि कतार में लगना ही पुराने जमाने की बात है।
आज तकनीक उपलब्ध है और ग्राहक क्या चाहते हैं, कब चाहते हैं, इसकी समझ भी है। ऐसे में एक दिलचस्प सवाल यह उठता है कि किसी को लाइन में लगकर इंतजार क्यों करना चाहिए?
जमाना बदल गया है
बाजार विश्लेषक कंपनी गार्टनर की वाइस प्रेसिडेंट टिफैनी फाउंटेन एप्पल शॉप्स का उदाहरण देती हैं, जहां टूटे आईपॉड या मैक को टेक्नीशियन को दिखाने के लिए ग्राहकों को पहले समय लेना पड़ता है। टिफैनी कहती हैं, "यह भी एक तरह की फास्ट-ट्रैकिंग है लेकिन यहां एहतियात है- स्टोर पर पहुंचने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि वहां कतार न हो।" किराने की दुकान में खरीदारी करते हुए सामान की स्कैनिंग करना हो या बैंक जाने की जगह ऑनलाइन भुगतान करना हो, कतार में खड़े होकर कोई काम पूरा करना अब पुराना लगता है।
कतार शायद कभी खत्म न हों और कुछ जगहों पर लोग उसका आनंद भी उठाते रहेंगे, लेकिन हम सब इस हकीकत से भी वाकिफ हैं कि कतार में लगना कई बार निरर्थक होता है।
यदि कोई कारोबार या सेवा खुद को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर ले तो हमें देर तक कतार में लगने की जरूरत न हो। हो सकता है कि प्राथमिकता वाली कतार या फास्ट-ट्रेक लेन सिर्फ पैसे बनाने की तरकीब हो। लेकिन ये योजनाएं हमारी उस धारणा की प्रतिक्रिया हैं कि हमेशा कतार में लगना मूर्खों का काम है।