सरकार द्वारा कर्ज के बोझ के तले दबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को बेचने की कवायद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है। गोयल ने दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच में गुरुवार को बोलते हुए कहा कि अगर वो मंत्री न होते तो फिर एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगा चुके होते।
सरकारी कंपनियों जैसे कि एयर इंडिया, बीपीसीएल में विनिवेश को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में गोयल ने यह बात कही। गोयल ने कहा कि जब हमारी सरकार 2014 में पहली बार बनी थी, तब अर्थव्यवस्था सबसे खराब दौर में थी। उसके बाद कई कदम उठाए गये, ताकि इसको सुधारा जा सके। अगर सरकार अपनी कंपनियों का विनिवेश नहीं करेगी, तो उनकी कुछ वैल्यू नहीं रहती।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज और अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए कई कदम उठाए हैं। गोयल ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि कमरे में बैठे हर व्यक्ति के मन में ऐसी कोई छवि नहीं होगी जहां वह मानता होगा कि सार्वजनिक बैंकों ने अच्छा काम नहीं किया।
दुनिया भर की या फिर अगर मैं दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का उदाहरण लूं तो 2008-09 में अर्थव्यवस्था धराशायी हो गई थी। आर्थिक पतन का कारण सरकारी बैंक नहीं बल्कि निजी बैंक थे। भारत में हमारे पास पर्याप्त निजी बैंक हैं, जिन्होंने हमारे के लिए कोई गौरव का काम नहीं किया। इसके विपरीत, यदि आप मुझसे सरकारी बैंकों के बारे में पूछे तो इन बैंकों ने राष्ट्र सेवा में काफी कुछ किया है।"
गोयल ने कहा कि भारत में निवेश करने को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह है। उन्होंने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते पर कहा कि यह एक "असंतुलित व्यापार समझौता" था , जो कि आरसीईपी के उन सिद्धांतों पर खरा नहीं उतर रहा था जिनको लेकर आठ साल पहले हमने बात शुरू की थी। सरकार मुक्त व्यापार समझौते पर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत करेगी। ब्रिटेन जनवरी के आखिर तक यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा।