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रिपोर्ट: जमा पर पांच लाख से ज्यादा की बीमा गारंटी से बैंकों के लाभ पर असर; मुनाफा हो सकता है 12000 करोड़ कम

Thu, 06 Mar 2025 05:26 AM IST
शिव शुक्ला बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इक्रा का कहना है कि न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक की हालिया विफलता के चलते बीमा की सीमा बढ़ाने का विचार आया होगा। लेकिन, ऐसे कदम से बैंकों के मुनाफे में 12,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है।
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आरबीआई (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पांच लाख रुपये से अधिक की बैंक जमा पर बीमा गारंटी की सीमा बढ़ाने से बैंकों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा, अभी बैंक डूबने की स्थिति में पांच लाख तक की जमाराशि को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) के जरिये कवर किया जाता है। सरकार इस सीमा को बढ़ाने का विचार कर रही है।

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इक्रा ने कहा, न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक की हालिया विफलता के चलते बीमा की सीमा बढ़ाने का विचार आया होगा। लेकिन, ऐसे कदम से बैंकों के मुनाफे में 12,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। इससे पहले पंजाब एवं महाराष्ट्र बैंक संकट के बाद फरवरी, 2020 में इस सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया था। मार्च, 2024 तक 97.8 फीसदी बैंक खाते पूरी तरह कवर हो चुके थे। जमा राशि मूल्य के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक बीमित जमा अनुपात (आईडीआर) 43.1 फीसदी रहा था।  
 
बैंकों में बीमा के तहत पैसा सुरक्षित रहता है
भारतीय बैंकों में सभी रकम डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) के तहत प्रति ग्राहक 5 लाख रुपये तक का जमा बीमा कवर होता है और इतनी ही रकम आपको मिलती है। भले ही जमा 10 लाख हो, या 20 लाख या एक करोड़। अगर किसी का जमा एक लाख है तो उसे एक लाख रुपये पूरे मिल जाएंगे। 5 लाख जमा है तो पांच लाख मिलेंगे। उससे ज्यादा जमा है तो भी पांच लाख रुपये ही मिलेंगे। हालांकि, अगर आपका जमा कई बैंकों में है और सारे बैंक डूबते हैं तो फिर हर बैंक पांच लाख रुपये देगा। लेकिन एक ही बैंक में कई खाते हैं तो कुल मिलाकर भी पांच लाख रुपये ही मिलेंगे। जारी मौजूदा निर्देशों के अनुसार, जमाकर्ताओं को रकम पाने के लिए छह महीने तक इंतजार करना होगा।
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डीआईसीजीसी की वेबसाइट पर देख सकते हैं पूरा विवरण
जमाकर्ता अधिक जानकारी के लिए बैंक अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। विवरण डीआईसीजीसी की वेबसाइट: www.dicgc.org.in पर भी देखा जा सकता है। आप पैसा निकालना चाहते हैं तो इसका बैंक सत्यापन करता है। सब कुछ सही पाया गया तो रकम वापस मिलती है। आरबीआई किसी भी बैंक पर तब प्रतिबंध लगाता है, जब बैंक की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं हो, या बैंक प्रबंधन कुछ घोटाला कर रहा हो। न्यू इंडिया सहकारी बैंक में घोटाला हुआ था। इसका पता चलने पर केंद्रीय बैंक ने तुरंत पूरे बैंक के प्रशासनिक अधिकार अपने हाथ में ले लिया और एसबीआई के एक पूर्व अधिकारी को प्रभार सौंप दिया।

खाता बड़े और प्रतिष्ठित बैंकों में खोलें
हमारे देश में छोटे जैसे क्रेडिट सोसाइटी और सहकारी बैंकों में गवर्नेंस का पालन बहुत कम होता है। इसका फायदा उठाते हुए इस तरह के संस्थान अपने लोगों या उन कंपनियों को ज्यादा कर्ज देते हैं जो इस रकम को लौटाने में सक्षम नहीं होती हैं। बाद में यह रकम एनपीए बन जाती है और बैंक की वित्तीय स्थिति गड़बड़ हो जाती है। ऐसे में कभी भी सरकारी या निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों में ही खाते खोलने चाहिए। इन बैंकों के गवर्नेस और नियम कायदे बहुत मजबूत होते हैं। अच्छे खासे बोर्ड और मैनेजमेंट के चलते इन बैंकों में गड़बड़ी की संभावना बहुत ही कम रहती है। इससे आपका पूरा पैसा सुरक्षित रहता है।

लाइसेंस रद्द या बंद नहीं होते ऐसे वित्तीय संस्थान
आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों को बैंकिंग लाइसेंस के रद्दीकरण या उसे बंद करने के रूप में नहीं समझना चाहिए। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कार्यों को जारी रखेगा। बदलती परिस्थितियों के आधार पर इन निर्देशों को आरबीआई संशोधित कर सकता है। समस्याओं के पूर्ण समाधान से पहले कुछ निकासी सीमाएं लागू करने की मंजूरी आरबीआई दे सकता है। इससे जमाकर्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
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