इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) के प्रमुख एमएस साहू ने बृहस्पतिवार को कहा कि सीमा पार दिवाला मामलों के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। केंद्र सरकार वैश्विक रूप से स्वीकृत तथा सर्वमान्य दिवाला प्रक्रिया की एक रूपरेखा लाने को इच्छुक है, जो एकरूपता तथा दिवाला प्रक्रिया की निश्चितता के मद्देनजर, विदेशी कर्जदाताओं के लिए भी भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाएगा।
सीमा पार दिवाला प्रक्रिया की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर साहू ने कहा कि टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं और प्राप्त भी हुई हैं। हम हालात को समझने के लिए बैठकें कर रहे हैं और प्रक्रिया जारी है। आईबीबीआई दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) को लागू करने वाला एक केंद्रीय निकाय है।
यह पूछे जाने पर कि क्या दिवाला कानून में और भी संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, उन्होंने कहा कि हम कानून में संशोधन के लिए हमेशा तैयार हैं, अगर कोई यह बताए कि अमुक समस्या है। हम इस कानून में बीते डेढ़ साल में छह बार संशोधन कर चुके हैं। और जब भी कोई समस्या पेश आती है, हम संशोधन करेंगे। हमें कोई हिचकिचाहट नहीं है।
साहू रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स के पहले बैच को प्रमाणपत्र वितरण के लिए आयोजित एक कार्यक्रम से इतर बोल रहे थे। केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत बृहस्पतिवार को रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स के पहले बैच का स्वागत किया।
चौधरी ने कहा कि सरकार रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स तथा रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स के संगठन से व्यावसायिक आचरण व नैतिकता के सबसे उच्च मानदंडों का पालन करने की अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार साल 2016 में दिवाला एवं दिवालियापन संहिता लाई थी। देश में कारोबारी माहौल में सुधार के लिए यह हमारी नीति के अनुरूप है।