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Report: पश्चिम एशिया संकट और एल नीनो के डबल झटके से भारतीय कंपनियों पर क्या असर? ICRA रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Thu, 18 Jun 2026 08:45 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ICRA Report: आईसीआरए ने चेतावनी दी है कि वेस्ट एशिया में तनाव और एल नीनो की आशंकाओं का असर भारत की कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और बढ़ती आयात लागत के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की संभावना है। साथ ही एल नीनो से ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है, जिससे कई उपभोक्ता क्षेत्रों की बिक्री और राजस्व वृद्धि धीमी पड़ सकती है। आइए, विस्तार से पूरी रिपोर्ट को समझते हैं....
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भारत की कंपनियों पर क्यों पड़ रहा असर? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत की बड़ी कंपनियों के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही आसान नहीं रहने वाली है। रेटिंग एजेंसी आसीआरए ने आगाह किया है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और एल नीनो की आशंकाएं भारत के कॉरपोरेट सेक्टर की आय और मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, रुपये की कमजोरी और आयात लागत में इजाफे के कारण कंपनियों के परिचालन लाभ मार्जिन में गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में मार्च तिमाही में अच्छी वृद्धि दर्ज करने वाली कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती दिख रही हैं।

क्या भारत की कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने वाला है?

आसीआरए के अनुसार अप्रैल-जून 2026-27 तिमाही में कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 100 से 150 बेसिस पॉइंट तक घट सकता है। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये में कमजोरी के चलते आयात लागत का बढ़ना है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव से ईंधन, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि कुछ कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी करके इस दबाव को कम करने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन अचानक कीमतें बढ़ाने से मांग प्रभावित होने का खतरा भी बना रहेगा।

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एल नीनो का असर ग्रामीण मांग पर कैसे पड़ सकता है?

आसीआरए ने कहा है कि एल नीनो की स्थिति बनने पर मानसून प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत में बड़ी आबादी खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो किसानों की आय प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग घट सकता है। इसका असर एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य मांग आधारित क्षेत्रों की बिक्री पर पड़ सकता है। एजेंसी का मानना है कि शहरी मांग कुछ हद तक स्थिर रह सकती है, लेकिन कुल मांग का माहौल चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

क्या राजस्व वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है?

मार्च 2025-26 तिमाही में इंडिया इंक की आय में सालाना आधार पर 13.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। लेकिन आसीआरए का अनुमान है कि जून तिमाही में यह वृद्धि घटकर एकल अंक यानी सिंगल डिजिट में आ सकती है। महंगाई का दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर सकती है। इससे खपत आधारित क्षेत्रों में वॉल्यूम ग्रोथ सीमित रहने की आशंका है। एजेंसी ने कहा कि निकट भविष्य में कंपनियों को मांग और लागत दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

किन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बनी हुई हैं?

आ का कहना है कि चुनौतियों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में निजी निवेश की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं से जुड़े उद्योग, पावर इक्विपमेंट, रियल एस्टेट और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश जारी रह सकता है। एजेंसी के अनुसार कंपनियों की बैलेंस शीट अभी भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन वैश्विक व्यापार, कमोडिटी कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों से जुड़ी अनिश्चितताएं आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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