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West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में तनाव से रूस-चीन को कैसे मिल रहा फायदा? रिपोर्ट में बताई गई यह वजह

Fri, 13 Mar 2026 01:51 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच जेफरिज की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति से रूस और चीन को आर्थिक फायदा हो सकता है। तेल की कीमतों में उछाल से रूस की ऊर्जा आय बढ़ने की संभावना है। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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इस्राइली और अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों की दिशा तेजी से बदल रही है। निवेश बैंक जेफरिज की एक रिपोर्ट के अनुसार इस संकट से रूस और चीन सबसे बड़े आर्थिक लाभार्थी के रूप में उभर रहे हैं।

तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे रूस की ऊर्जा आय में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रूस की वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है।

रूस और चीन को मिल रहा फायदा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस भू-राजनीतिक स्थिति के चलते भारत के लिए रूसी तेल खरीदने को लेकर चिंताएं भी कम हुई हैं। बढ़ती कीमतों के बीच रूस की ऊर्जा आपूर्ति फिर से महत्वपूर्ण बन गई है।

  • दूसरी ओर चीन को अपेक्षाकृत स्थिर घरेलू बाजार का लाभ मिल रहा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार चीन की सरकार शेयर बाजार को धीरे-धीरे मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि गिरते रियल एस्टेट सेक्टर की जगह शेयर बाजार चीनी परिवारों के लिए संपत्ति सृजन का प्रमुख साधन बन सके।
  • शंघाई बाजार में धीमी बुल मार्केट को सरकार की दीर्घकालिक नीति माना जा रहा है।

वैश्विक ऊर्जा मार्गों में व्यवधान को लेकर दी गई चेतावनी

हालांकि रिपोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि अगर वैश्विक ऊर्जा मार्गों में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका का फैसला

इस बीच अमेरिका ने अगले सप्ताह से अपने सामरिक तेल भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार यह कदम ऊर्जा रणनीति में दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है, क्योंकि इससे पहले भंडार को पर्याप्त स्तर तक भरने की कोशिश नहीं की गई।

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फिलहाल अमेरिका के सामरिक तेल भंडार में करीब 415 मिलियन बैरल तेल मौजूद है, जो इसकी अधिकतम क्षमता 714 मिलियन बैरल का लगभग 58 प्रतिशत है। यह जुलाई 2020 में दर्ज 656 मिलियन बैरल के स्तर से काफी कम है।

अमेरिकी राष्ट्रपति पर राजनीतिक जोखिम का खतरा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान पर हमले का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकता है। कुछ विश्लेषक इसे अमेरिका के लिए संभावित सुएज मोमेंट से जोड़कर देख रहे हैं, यानी ऐसा क्षण जो वैश्विक प्रभाव में गिरावट का संकेत दे सकता है।

सुएज मोमेंट का मतलब होता है ऐसा ऐतिहासिक मोड़, जब किसी बड़ी शक्ति की अंतरराष्ट्रीय ताकत और प्रभाव अचानक कमजोर पड़ते हुए दिखाई दें। यह शब्द 1956 के सुएज संकट से निकला है।

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