पहली बार 2022-23 के नए आधार वर्ष पर तैयार किए गए ताजा आंकड़ों ने देश के आवास बाजार की एक मिश्रित तस्वीर पेश की है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 18 प्रमुख शहरों में मकानों के दाम औसतन 2.2 फीसदी बढ़े हैं। हालांकि कुछ बड़े शहरों में गिरावट के कारण समग्र सूचकांक तिमाही आधार पर थोड़ा नीचे आया है।
आरबीआई ने बताया कि अखिल भारतीय आवास मूल्य सूचकांक (एचपीआई) पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2.2 फीसदी बढ़ा है, जबकि एक साल पहले यह वृद्धि 7 फीसदी थी। नई श्रृंखला में आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है, जिसका स्थान पहले 2010-11 था। केंद्रीय बैंक यह सूचकांक राज्यों के पंजीकरण कार्यालयों से मिले वास्तविक लेनदेन के आधार पर तय करता है।
किन शहरों ने वृद्धि को समर्थन दिया
नागपुर, गाजियाबाद और चंडीगढ़ जैसे शहरों में मकानों के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। इन शहरों की बढ़त ने राष्ट्रीय औसत वृद्धि को ऊपर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं मुंबई, दिल्ली, बंगलूरू, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर, कोच्चि सहित कई शहरों में स्थिरता या हल्की बढ़त का रुझान देखा गया।
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इन शहरों में दामों में गिरावट
कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ और हैदराबाद ने इस बार सूचकांक को नीचे खींचा। इन शहरों में मकानों का मूल्य घटने से दूसरी तिमाही का एचपीआई पहली तिमाही के 113.4 से घटकर 112.7 पर आ गया। इन शहरों में मांग की सुस्ती या बाजार समायोजन को गिरावट का कारण माना जा रहा है।
तिमाही आधार पर 0.6 फीसदी की कमी
आरबीआई के अनुसार तिमाही आधार पर सूचकांक में 0.6 फीसदी की कमी हुई। इस कमी में मुख्य रूप से कोलकाता, चेन्नई और लखनऊ का योगदान रहा। इन शहरों में लगातार दो तिमाहियों से गिरावट का रुझान दिखाई दे रहा है, जिसने कुल सूचकांक को प्रभावित किया है।
कुल 18 प्रमुख शहरों की सूची
आरबीआई के आवास मूल्य सूचकांक में शामिल शहरों में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू, लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, कानपुर, कोच्चि, हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम, पुणे, गाजियाबाद, ठाणे, गौतम बुद्ध नगर, चंडीगढ़ और नागपुर शामिल हैं। इन शहरों में वास्तविक लेनदेन के आधार पर ही देश के आवास बाजार की स्थिति का स्वरूप तय किया जाता है।
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