भारत के हाउसिंग बाजार में बड़ा बदलाव
घरों की बिक्री में लगभग 8 फीसदी की कमी आई, लेकिन कुल वैल्यू करीब 15 फीसदी बढ़ गई। इससे पता चलता है कि लोग अब महंगे घरों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (दक्षिण-पूर्व एशिया) अंशुमान मैगजीन ने कहा, भारत का हाउसिंग बाजार एक संरचनात्मक मोड़ पर है। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति में नरमी, कीमतों में बढ़ोतरी की गति में कमी और घरेलू खर्च योग्य आय में बढ़त होने से शहरों और मध्यम आय वर्ग में घर खरीदने की स्थितियों में सुधार होने की उम्मीद है। रिपोर्ट बताती है कि इस क्षेत्र में 2026 तक बिक्री के मूल्य-बनाम-मात्रा के समीकरणों में बड़ा अंतर दिख सकता है।
सस्ते घरों की चुनौती बरकरार
45 लाख से कम कीमत वाले घरों की उपलब्धता पर अब भी दबाव बना है। इनकी निर्माण लागत बढ़ गई है। सरकारी छूट कम हो गई है। अगर सरकार कीमत और क्षेत्रफल से जुड़े नियमों में बदलाव करे तो इस सेगमेंट की हिस्सेदारी फिर से 25-30 फीसदी हो सकती है।
आलीशान घरों की मांग बढ़ी
- 2025 में हाउसिंग मार्केट में बड़ा बदलाव देखा गया।
- 2.7 लाख से ज्यादा नए घर बने।
- 2.7 लाख से ज्यादा घर बिके।
- लक्जरी और प्रीमियम घरों की बिक्री 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी।
- कुल बिक्री में हाई-एंड सेगमेंट की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही।
- कुल बिक्री में 8 फीसदी की हल्की गिरावट आई।
- घरों की कुल वैल्यू 15 फीसदी बढ़ी, यानी लोग महंगे घर ज्यादा खरीद रहे हैं।
ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही में देश के टॉप 7 शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग 15 फीसदी बढ़कर 183 लाख वर्ग फीट हो गई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 15.9 मिलियन वर्ग फीट था। बंगलूरू सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट बना रहा, जहां लीजिंग 18 फीसदी बढ़कर 53 लाख वर्ग फीट पहुंच गई।